पटना अस्पतालों में लेट-लतीफी बंद, गैर हाजिर डॉक्टरों का वेतन रुकेगा
पटना में अब अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों की लेट-लतीफी और लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना सूचना के अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मियों का वेतन रोका जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना और मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करना है।
जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि सभी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उप-केंद्रों और अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों व पैरामेडिकल कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सेवाओं के प्रति ‘पब्लिक परसेप्शन’ को बेहतर बनाना अत्यंत आवश्यक है। मरीजों को समय पर उपचार, मानक के अनुरूप प्रतीक्षा समय, निःशुल्क दवा व जांच, अस्पतालों की साफ-सफाई और गुणवत्तापूर्ण भोजन किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होना चाहिए।
समीक्षा बैठक में ओपीडी, आइपीडी, एएनसी, संस्थागत प्रसव और अन्य प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों पर प्रखंडों के प्रदर्शन की भी समीक्षा की गई। पाया गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बख्तियारपुर में अप्रैल से अक्टूबर तक सी-सेक्शन डिलिवरी शून्य रही। इस पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा है और निर्देश दिया है कि जब तक पहली सी-सेक्शन डिलिवरी नहीं हो जाती, तब तक दोनों का वेतन अवरुद्ध रखा जाएगा।
इसके अतिरिक्त, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोकामा, रेफरल अस्पताल मोकामा और गर्दनीबाग अस्पताल के कई चिकित्सा अधिकारी बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए। जिलाधिकारी ने इस कृत्य को ‘गंभीर और आपत्तिजनक’ बताते हुए सभी अनुपस्थित चिकित्सकों का वेतन अगले आदेश तक रोकने का आदेश दिया है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मियों को वेतन केवल बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर ही मिलेगा। सभी उपाधीक्षक एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को प्रतिदिन की बायोमेट्रिक उपस्थिति रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य समिति के व्हाट्सएप ग्रुप में भेजनी होगी। इस व्यवस्था से स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और अस्पतालों में व्यवस्था सुधरेगी। जिलाधिकारी ने आयुष्मान कार्डधारकों के उपचार, नियमित टीकाकरण, प्रसवपूर्व देखभाल, ई-संजीवनी के माध्यम से टेली-परामर्श और वेक्टर बार्न रोग नियंत्रण जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।
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