पटियाला में पराली जलाने के मामलों में 56% की कमी, प्रशासन की सख्ती लाई रंग
पंजाब के पटियाला जिले से धान की कटाई के सीजन के समाप्त होने के साथ ही पराली जलाने के मामलों में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई है, जो प्रशासन द्वारा अपनाई गई सख्त नीतियों और जागरूकता अभियानों की सफलता को दर्शाता है। इस वर्ष 22 नवंबर तक जिले में पराली जलाने की कुल 235 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि पिछले वर्षों की तुलना में यह आंकड़ा कहीं अधिक था। वर्ष 2022 में जहां 3335 मामले सामने आए थे, वहीं 2023 में यह संख्या घटकर 1879 और 2024 में 541 रह गई थी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, किसानों को पराली जलाने के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने, वैकल्पिक प्रबंधन के साधन उपलब्ध कराने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई ने इस बार बड़ी भूमिका निभाई है। इस सीजन में पराली जलाने के मामलों में कुल 8.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से लगभग पूरी राशि 8.65 लाख रुपये की वसूली भी हो चुकी है। इसके अलावा, सीजन के दौरान 170 रेड एंट्री और 172 एफआईआर भी दर्ज की गईं।
पटियाला जिले में पराली जलाने के खिलाफ ‘ज़ीरो टालरेंस पॉलिसी’ लागू की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप किसानों ने भी नियमों का पालन करने का प्रयास किया। गांवों में नोडल अधिकारियों की नियमित तैनाती, स्ट्रॉ मैनेजमेंट मशीनों की उपलब्धता और पंचायतों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस कमी को लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले वर्षों में पराली जलाने को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, साथ ही किसानों को यह भी समझाया जा रहा है कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी कम करता है। भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है।
हालांकि, पराली जलाने के मामलों में गिरावट एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन हवा की गुणवत्ता पर इसका प्रभाव सीमित ही रहा। सीजन के दौरान जिले का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 6 दिनों तक ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। दो नवंबर को एक्यूआई 286 के साथ सबसे प्रदूषित दिन रहा। इसके अलावा, 21 नवंबर को 206, 22 नवंबर को 262, एक नवंबर को 209, तीन नवंबर को 250 और आठ नवंबर को 204 एक्यूआई दर्ज किया गया, जो चिंताजनक है। यह दर्शाता है कि वायु प्रदूषण के लिए पराली जलाना एकमात्र कारण नहीं है और अन्य कारक भी इसमें योगदान करते हैं।
