अपच समझकर किया नजरअंदाज, तीन दिन बाद ब्रिटिश नर्स की दर्दनाक मौत
ग्रेटर मैनचेस्टर के टेमसाइड में रहने वाली पाउला इवर्स को मार्च 2024 में टेमसाइड अस्पताल के आपातकालीन विभाग में सीने में असहनीय दर्द के साथ ले जाया गया था। उन्होंने इस दर्द को प्रसव से भी बदतर बताया था। हालांकि, उनके गंभीर लक्षण और हृदय संबंधी समस्याओं के पारिवारिक इतिहास के बावजूद, अस्पताल के डॉक्टरों ने इसे सामान्य अपच समझकर खारिज कर दिया।
तत्काल जांचों, जिनमें छाती का एक्स-रे और खून की जांच शामिल थी, में कोई असामान्य बात नहीं दिखी और उनके वाइटल साइंस भी सामान्य बताए गए। डॉक्टरों ने पाउला को आश्वस्त किया कि यह दर्द शायद फंसी हुई हवा या अपच के कारण है और उन्हें केवल गैविस्कॉन नामक दवा खरीदने की सलाह देकर घर भेज दिया गया।
दुर्भाग्यवश, अस्पताल से छुट्टी मिलने के मात्र तीन दिन बाद, पाउला की नौ साल की बेटी ने उसे अपने बेडरूम के फर्श पर बेसुध पाया। बाद में जांच में पता चला कि पाउला को वक्षीय महाधमनी विच्छेदन (thoracic aortic dissection) हुआ था, जो एक जानलेवा स्थिति है। इस स्थिति के कारण आंतरिक रक्तस्राव हुआ और अंततः हृदयाघात से उनकी मृत्यु हो गई।
स्टॉकपोर्ट कोरोनर कोर्ट में हुई विस्तृत जांच के दौरान यह बात सामने आई कि पाउला की गंभीर स्थिति को काफी कम करके आंका गया था। सीने में जो दर्द उन्होंने बताया था, वह संभवतः एक गंभीर हृदय संबंधी समस्या का प्रारंभिक और महत्वपूर्ण संकेत था, जिसे समय पर पहचाना और इलाज नहीं किया गया।
इस दुखद घटना के बाद, पाउला के परिवार ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अस्पताल अपने देखभाल और निदान के कर्तव्य में बुरी तरह विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप एक मां और नर्स की जान चली गई। यह मामला चिकित्सा देखभाल में लापरवाही और निदान की त्रुटियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
