पैंटून पुल का निर्माण अटका, 30 की जगह 80 किमी तय कर रहे ग्रामीण
हरदोई जिले के कटियारी क्षेत्र के लोगों के लिए गंगा नदी पर पैंटून पुल का निर्माण न होना एक बड़ी समस्या बन गया है। चियासार गांव के पास गंगा नदी पर आवागमन के लिए पैंटून पुल का निर्माण न होने के कारण स्थानीय निवासियों को जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करनी पड़ रही है। इस वजह से उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए 30 किलोमीटर की बजाय लगभग 80 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में गंगा नदी पर 63 लाख रुपये की लागत से पैंटून पुल के निर्माण को शासन द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई थी। पुल का निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया गया था। नियमानुसार, बाढ़ की आशंका को देखते हुए पुल को 15 जून को हटा दिया जाना था और गंगा में पानी कम होने के बाद 15 अक्टूबर को पुनः चालू कर दिया जाना था। पिछले वर्ष पुल को समय पर हटा तो लिया गया, लेकिन इसके पुनर्निर्माण और संचालन में देरी हो गई।
इस देरी के कारण, ग्रामीणों को पूरे वर्ष नाव के सहारे ही नदी पार करनी पड़ी। इस वर्ष भी पैंटून पुल का निर्माण समय पर नहीं हो सका और नावों का संचालन भी शुरू नहीं हो पाया है। इससे कटियारी क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों, जिनमें जीवनपुरवा, जवाहरपुरवा, दहेलिया, सुलखामऊ, बेहटालाखी, निकामदपुर, बारामऊ, ढकपुरा आदि शामिल हैं, के लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
गंगा नदी में जलस्तर घटने के बाद कई धाराओं में बंट जाने के कारण नावों का संचालन भी अब मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को मजबूरन कुसुमखोर या फर्रुखाबाद के रास्ते 80 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है, बल्कि स्थानीय व्यापार पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। चियासर प्राचीन घाट, जहाँ च्यवन ऋषि का आश्रम स्थित है और जहाँ मान्यता है कि उन्होंने च्यवनप्राश का निर्माण किया था, के पास पुल न होने से गुरसहायगंज कस्बे से कटियारी क्षेत्र तक होने वाले इलेक्ट्रिक सामान के व्यापार पर भी असर पड़ा है।
