पी साईनाथ का बड़ा बयान: देश में बढ़ रही है आर्थिक असमानता, 93% सांसद करोड़पति, India inequality पर चिंता
वरिष्ठ पत्रकार और रमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित लेखक पी. साईनाथ ने देश में बढ़ती आर्थिक असमानता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। लखनऊ में जन विचार मंच द्वारा आयोजित ‘असमानता के दौर में मीडिया’ विषयक सेमिनार में उन्होंने कहा कि भारत इस समय भयंकर असमानता के दौर से गुजर रहा है, जो समाज के विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त है। यह स्थिति आम जनता के जीवन पर गहरा प्रभाव डाल रही है, जिससे सामाजिक और आर्थिक खाई लगातार बढ़ रही है।
साईनाथ ने इस असमानता को कम करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि जब तक काम का अधिकार और शिक्षा का अधिकार जैसे मूलभूत अधिकार संविधान के नीति-सिद्धान्तों से निकलकर मूल अधिकारों में शामिल नहीं हो जाते, तब तक इस असमानता को कम करना मुश्किल होगा। उनके अनुसार, इन अधिकारों को मूल अधिकार बनाने से सामाजिक असमानता में कमी आएगी और सभी नागरिकों को समान अवसर मिल सकेंगे।
उन्होंने लोकसभा के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि किस तरह से आर्थिक असमानता राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी झलकती है। पी. साईनाथ ने कहा कि 2004 में लोकसभा में कुल 543 सांसदों में से केवल 30 प्रतिशत सांसद करोड़पति थे। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि 2024 तक यह संख्या बढ़कर 93 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा देश में बढ़ती आर्थिक विषमता और उसके राजनीतिक प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
सेमिनार में पी. साईनाथ ने अपनी पुस्तक ‘तगड़ा सूखा सबके मन भावे’ पर भी चर्चा की, जिसका अनुवाद 12 भारतीय भाषाओं में हो चुका है। संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार नवीन जोशी ने की, जिन्होंने हिंदी अखबारों में ‘गांव की चिट्ठी’ जैसे कॉलम के महत्व को याद किया। इस कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. रूपरेखा वर्मा, प्रो. रमेश दीक्षित, प्रो. नदीम हसनैन और प्रतुल जोशी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार साझा किए।
