दिल्ली दंगा आरोपी शादाब अहमद को एलएलबी की पढ़ाई के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, ट्रायल कोर्ट जाने का निर्देश | delhi riots accused shadab ahmed llb education
साल 2020 के बहुचर्चित दिल्ली दंगों के मामले में कानूनी शिकंजे में फंसे आरोपी शादाब अहमद को अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है, जिसमें उसने अपनी एलएलबी की पढ़ाई जारी रखने के लिए जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग की थी। अदालत ने उसे निर्देश दिया है कि वह अपनी इस मांग को लेकर संबंधित ट्रायल कोर्ट का रुख करे।
न्यायालय के समक्ष रखी गई दलीलों के अनुसार, आरोपी ने गाजियाबाद स्थित एक लॉ कॉलेज में कानून की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया है। इसके अलावा उसने दिल्ली विश्वविद्यालय में भी आवेदन किया था। उसकी मुख्य मांग यह थी कि कॉलेज की नियमित कक्षाएं सुबह दस बजे से दोपहर तीन बजे तक चलती हैं, इसलिए उसे दिल्ली एनसीआर की सीमा से बाहर जाने की अनुमति दी जाए। साथ ही, पुलिस थाने में नियमित रूप से हाजिरी लगाने की शर्त में भी बदलाव किया जाए, ताकि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
बता दें कि आरोपी को इस वर्ष की शुरुआत में ही उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली थी, लेकिन अदालत ने रिहाई के साथ कई कड़ी शर्तें भी थोपी थीं। इनमें एक प्रमुख शर्त यह थी कि वह बिना ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से बाहर कदम नहीं रख सकता है। इसी कानूनी बाध्यता के कारण उसे गाजियाबाद जाकर कक्षाएं अटेंड करने में परेशानी आ रही थी।
इस पूरे घटनाक्रम से एक बार फिर यह सवाल खड़ा होता है कि आपराधिक मामलों में विचाराधीन या आरोपी व्यक्तियों के पुनर्वास और शिक्षा के अधिकारों को किस प्रकार संतुलित किया जाना चाहिए। हालांकि अदालतें मामले की गंभीरता और पूर्व में दी गई शर्तों की पालना को सर्वोपरि रखती हैं, लेकिन इस तरह के मामलों में न्यायपालिका का रुख हमेशा कानूनी प्रक्रियाओं के दायरे में रहकर ही तय होता है। अब सबकी निगाहें कड़कड़डूमा कोर्ट पर टिकी हैं कि वह आरोपी की पढ़ाई से जुड़े इस आवेदन पर क्या निर्णय लेती है।
