मणिपुर में ‘टाइगर रोड’ पर NGT का बड़ा एक्शन, बिना मंजूरी बनी सड़क पर रोक, जानिए क्या है ‘Manipur news’ का news’ मामला’
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मणिपुर में छह जिलों के जंगलों से गुजरने वाली एक अनाधिकृत रिंग रोड के निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी है। NGT ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित जिलों के पुलिस प्रमुखों और मजिस्ट्रेटों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दें कि इस सड़क पर कोई और निर्माण कार्य न हो। यह सड़क राज्य सरकार की मंजूरी के बिना बनाई जा रही थी।
NGT का यह आदेश मेइतेई समुदाय के सिविल सोसाइटी संगठनों की अंब्रेला बॉडी COCOMI की याचिका पर आया है। COCOMI ने अपनी अर्जी में कहा था कि जंगल वाले इलाकों में सड़क बनाने का काम पर्यावरण और भूवैज्ञानिक सुरक्षा मूल्यांकन के बिना जारी नहीं रखा जा सकता। संगठन ने प्रोजेक्ट साइट का निरीक्षण करने और नियम तोड़ने वालों को सजा देने के लिए विशेषज्ञों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाने की मांग की थी।
अवैध निर्माण और उग्रवादियों के नाम पर सड़क
NGT ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने उन्हें बताया है कि चुराचांदपुर, कांगपोकपी, नोनी और उखरुल जिलों में जंगल और पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली इस सड़क का निर्माण कुकी समुदाय द्वारा किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि इस सड़क को स्थानीय तौर पर ‘जर्मन रोड’ और ‘टाइगर रोड’ कहा जाता है, जो कुकी विद्रोहियों के उपनाम हैं।
बिना मंजूरी के बन रही थी सड़क
याचिकाकर्ता ने NGT को बताया कि इस निर्माण के लिए संबंधित अधिकारियों, जैसे पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन निदेशालय, ग्रामीण इंजीनियरिंग विभाग और वन विभाग से कोई आधिकारिक मंजूरी, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या वन मंजूरी जारी नहीं की गई है। सैटेलाइट इमेज से भी पता चलता है कि इकोलॉजिकली संवेदनशील इलाकों में गैर-कानूनी गतिविधि हो रही है।
COCOMI ने यह भी आरोप लगाया कि मणिपुर संकट के दौरान इस सड़क का इस्तेमाल एक गुप्त गलियारे के रूप में किया गया था। इन आरोपों में अवैध ड्रग्स की तस्करी, छोटे हथियारों और गोला-बारूद की अनधिकृत आवाजाही, और बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की आवाजाही के लिए इसका संदिग्ध इस्तेमाल शामिल है। संगठन ने कहा कि इस तरह के अवैध निर्माण से मणिपुर के लोग नाराज हैं और यह कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती है।
