IIT बॉम्बे छात्र मौत मामले में छात्रों की सफाई, व्यवस्थागत सुधार की मांग | mumbai news
आईआईटी बॉम्बे के परिसर में छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की दुखद मौत के बाद उपजे विवाद में अब छात्र प्रतिनिधियों ने भी आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखा है। संस्थान द्वारा शुरुआती बयानों पर सार्वजनिक माफी मांगने के बाद, छात्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध किसी भी प्रकार के नकल या शैक्षणिक कदाचार का समर्थन करने के लिए नहीं था। उनका मुख्य उद्देश्य संस्थान में लंबे समय से मौजूद व्यवस्थागत कमियों को उजागर करना और मजबूत संस्थागत सुधार की मांग करना था [mumbai news]।
प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद
घटना के बाद निदेशक और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक ओपन हाउस का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों को अपनी बात खुलकर रखने का अवसर मिला। प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को लेकर छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य उन्हें बिना जांच के दोषी ठहराना नहीं था, बल्कि जांच प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के लिए उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अस्थायी रूप से मुक्त करने की मांग की गई थी। फैकल्टी फोरम ने भी स्पष्ट किया है कि प्रोफेसर को निलंबित नहीं किया गया है, बल्कि केवल डीन पद की जिम्मेदारियों से हटाया गया है।
पुलिस जांच और न्याय की मांग
साहिल के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस बीच, विभिन्न छात्र संगठन पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही तय किए जाने की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक दबाव के मुद्दों पर गंभीर आत्मમंथन की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
