धर्म और संस्कृति के संवर्धन से ही सशक्त होगा राष्ट्र, आगरा में विचार गोष्ठी का आयोजन | agra news
आगरा में हाल ही में आयोजित एक विचार गोष्ठी में विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने राष्ट्र निर्माण में धर्म और संस्कृति की अहम् भूमिका पर मंथन किया। वक्ताओं का मानना था कि किसी भी देश की प्रगति उसकी संस्कृति और नैतिक मूल्यों की सुदृढ़ता पर निर्भर करती है। [agra news]
कार्यक्रम के दौरान दिवंगत पत्रकार नरेंद्र मोहन के योगदान को याद करते हुए शिक्षाविदों और साहित्यकारों ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा से वैश्विक कल्याण और समाज को सर्वोपरि मानने की प्रेरणा देती है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि धर्म का वास्तविक अर्थ कर्मकांड या मजहब नहीं, बल्कि उच्च आचरण और मानव कल्याण है।
इस तरह के वैचारिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध विरासत से जुड़ती है। संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण से ही एक सुदृढ़ और आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव मजबूत होती है, जिससे देश आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है।
