ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, चुनाव आयोग के फैसले को दी चुनौती | west bengal politics news
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त भूचाल आ गया जब चुनाव आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न पर रोक लगा दी। इसके साथ ही नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव की तस्वीर भी एक ही दिन में पूरी तरह बदल गई, जहां ममता गुट की उम्मीदवार ने नामांकन वापस ले लिया और बाद में ममता द्वारा समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार को एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इन ताबड़तोड़ झटकों ने विपक्षी खेमे को झकझोर कर रख दिया है [west bengal politics news]。
सुप्रीम कोर्ट में याचिका और कानूनी लड़ाई
इन घटनाक्रमों से घिरे ममता बनर्जी गुट ने सर्वोच्च अदालत में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पहली याचिका में चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें पारंपरिक प्रतीक के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। वहीं दूसरी याचिका में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी विधायकों की अयोग्यता पर निर्णय लेने में हो रही देरी को उठाया गया है। ममता गुट का तर्क है कि जब तक बागी विधायकों की सदस्यता पर फैसला नहीं होता, तब तक पार्टी के नाम और सिंबल का निर्धारण कानूनी रूप से गलत है। इस राजनीतिक संकट का सीधा असर आम जनता और राज्य की प्रशासनिक स्थिरता पर पड़ रहा है, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित हो रहा है।
नंदीग्राम में सियासी उलटफेर और आगे की राह
नंदीग्राम उपचुनाव के रण में नाटकीय मोड़ तब आया जब ममता द्वारा समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने 2007 के भूमि आंदोलन से जुड़े एक पुराने मामले में दबोच लिया। इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे सत्ता पक्ष की राजनीतिक साजिश करार दिया है। आने वाले दिनों में यह कानूनी और राजनीतिक संघर्ष राज्य की दिशा तय करेगा, क्योंकि अदालत के फैसलों पर ही सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
