गुरुग्राम हत्याकांड में पैसों का विवाद और दो दिन कार में शव लेकर घूमने का खुलासा | national crime news
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सनसनीखेज युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने उसकी पूर्व सहकर्मी और उसके साथी को दबोच लिया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि वित्तीय लेनदेन के विवाद ने इस खूनी संघर्ष को जन्म दिया, जिससे एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। [national crime news]
घटनाक्रम के अनुसार, दिल्ली के सरिता विहार निवासी युवराज अपनी शादी की खरीदारी बीच में छोड़कर गुरुग्राम एक मीटिंग के लिए गए थे। गुरुग्राम के सेक्टर-29 में उनकी मुलाकात पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स से हुई। दोनों के बीच पुराने पैसों के हिसाब को लेकर तीखी बहस हुई, जो इतनी बढ़ गई कि युवराज की गर्दन में दो गोलियां दाग दी गईं। हत्या के बाद अपराधियों ने बेरहमी दिखाते हुए शव को अपनी ही कार में छिपा लिया और दो दिनों तक शहर की सड़कों पर ठिकाने की तलाश में घूमते रहे। अंततः शव को सेक्टर-70 के एक नाले में फेंककर वे उत्तराखंड के कैंची धाम भाग निकले।
परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई गुमशुदगी की रिपोर्ट और मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस का इस्तेमाल किया। नए सिम कार्ड की लोकेशन के सहारे उत्तराखंड पहुंची पुलिस टीम ने दोनों आरोपियों को धर दबोचा। इस सनसनीखेज वारदात ने नौकरीपेशा लोगों के बीच वित्तीय पारदर्शिता और आपसी रिश्तों में आ रही दरार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने आरोपियों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जहां पुलिस बैंक खातों के ट्रांजैक्शन खंगालने में जुटी है।
