up politics news: खतौनी और पैमाइश में लापरवाही पर योगी सरकार का कड़ा एक्शन, 4 तहसीलदार सस्पेंड
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक कसावट लाते हुए राज्य सरकार ने राजस्व मामलों के समयबद्ध निस्तारण में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल ही में राजस्व न्यायालयों के कामकाज की समीक्षा की गई थी, जिसमें वादों के निस्तारण में ढिलाई पाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई गई थी। इसी के बाद राजस्व परिषद ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है। इस सख्त कदम से लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत आने वाले मामलों की न्यायालयवार गहन समीक्षा की गई थी। इस दौरान प्रतापगढ़, बलिया, संतकबीर नगर, लखनऊ और गोंडा से जुड़े अधिकारियों के स्तर पर फाइलों को लटकाए रखने और कार्यप्रणाली संतोषजनक न पाए जाने के तथ्य सामने आए। शासन की स्पष्ट प्राथमिकता के बावजूद आम जनता से जुड़े इन महत्वपूर्ण मामलों में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों पर अब अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के कड़े फैसलों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जमीन से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण को बल मिलेगा। किसानों और आम नागरिकों को छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी। सरकार की इस नीति से भ्रष्टाचार पर लगाम लगने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रियाओं में भी तेजी आएगी।
राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी अधिकारियों के कामकाज की मॉनिटरिंग जारी रहेगी। यदि आगे भी किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर फाइलें लंबित रखने का मामला सामने आता है, तो और भी कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को पूरी तरह पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय दिलाना है।
