कानपुर देहात के रनिया क्षेत्र में कृषि विभाग और सहकारिता तंत्र की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां किसानों के हक की खाद पानी में बह गई। रनियां की साधन सहकारी समिति में नाला चोक...
कानपुर देहात के रनिया क्षेत्र में कृषि विभाग और सहकारिता तंत्र की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां किसानों के हक की खाद पानी में बह गई। रनियां की साधन सहकारी समिति में नाला चोक होने और जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो गया। इस गंभीर लापरवाही के कारण किसानों के लिए आई डीएपी और यूरिया की करीब 170 बोरियां पानी में भीगकर पूरी तरह खराब हो गई हैं, जिससे इस kanpur news ने स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सुस्ती की पोल खोल दी है।
मौजूदा समय में जब रबी सीजन के दौरान किसान डीएपी और यूरिया के लिए समितियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, ऐसे में खाद का इस तरह बर्बाद होना कृषि व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलभराव की यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई थी, बल्कि यदि समय रहते नालों की सफाई करवा दी जाती तो इस नुकसान को आसानी से टाला जा सकता था। जर्जर भवन और खराब प्रबंधन के चलते अन्नदाताओं को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।
समिति के सचिव चंद किशोर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि लगातार हुई बारिश और नाला चोक होने की वजह से परिसर में पानी भरा था, जिससे लगभग 100 बोरी डीएपी और 70 बोरी यूरिया खराब हुई है। इस नुकसान से लगभग 50 किसानों को समय पर खाद मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। खाद की किल्लत के बीच इस तरह का नुकसान सीधे तौर पर कृषि उत्पादन और किसानों की आजीविका को प्रभावित करता है।
इस घटना के बाद से किसानों में भारी गुस्सा है और वे लापरवाह जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस तरह की प्रशासनिक उदासीनता न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि यह किसानों के अधिकारों के प्रति गंभीर लापरवाही को भी दर्शाती है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में कृषि कार्यों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।