उज्जैन से जुड़े UP के नकली दवा नेटवर्क का भंडाफोड़, Ayurvedic लाइसेंस की आड़ में बन रही थी Fake Medicine
उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवा कारोबार का अंतर्राज्यीय कनेक्शन एक बार फिर सामने आया है। लखनऊ में दर्ज एक मामले की जांच करते हुए एफएसडीए और पुलिस की टीम मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंची। वहां स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर एक बड़े नकली दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया गया है।
इस कार्रवाई में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण के लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवा ‘लीवेरा-500’ का अवैध रूप से निर्माण किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि करीब 4.80 लाख टैबलेट, यानी लगभग 32 हजार स्ट्रिप्स तैयार करके हरिद्वार भेजी जानी थीं।
संयुक्त टीम ने उज्जैन के आगरा रोड स्थित मेसर्स रुद्राया फार्मा पर छापा मारा। फर्म संचालक प्रेम मलिक और उसके बेटे राहुल मलिक को मौके पर पाया गया। जांच में पता चला कि फर्म के पास केवल आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण का लाइसेंस था, लेकिन वे इसका दुरुपयोग कर रहे थे। पूछताछ में प्रेम मलिक ने बताया कि वह पिछले 8-10 वर्षों से एजाज अहमद के साथ काम कर रहा है। एजाज के निर्देश पर मुंबई की फर्मों से दवा बनाने के लिए जरूरी सामग्री मंगाई जाती थी और उज्जैन की फैक्ट्री में टैबलेट तैयार की जाती थीं। टीम ने संबंधित बिल, इनवॉइस और अन्य सबूत जब्त कर लिए हैं। फर्म संचालक प्रेम मलिक के खिलाफ लखनऊ के अमीनाबाद थाने में दर्ज एफआईआर में नामजद करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह के रैकेट आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, क्योंकि नकली दवाएं अप्रभावी या हानिकारक हो सकती हैं।
