बसपा में आकाश आनंद को फिर झटका, मायावती का यू-टर्न; जानें क्या है पूरा मामला
बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद को राजनीतिक झटका दिया है। पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में मायावती ने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद अभी राजनीतिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं हुए हैं और उन्हें आगे और अनुभव की आवश्यकता है। इस कारण, जब तक वे परिपक्व नहीं हो जाते, उन्हें पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। मायावती ने आकाश आनंद से बसपा के राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर का पद भी वापस ले लिया है, हालांकि उन्हें पार्टी से निष्कासित नहीं किया गया है। यह पहली बार नहीं है जब उनसे जिम्मेदारी छीनी गई हो; उन्हें पहले भी दो बार पार्टी से बाहर किया जा चुका है।
मायावती के इस फैसले के बाद, आकाश आनंद ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर का पद हटा दिया है और अब वे खुद को केवल ‘बसपा कार्यकर्ता’ के रूप में वर्णित कर रहे हैं। उनकी भूमिका फिलहाल एक सामान्य कार्यकर्ता तक सीमित रहेगी। 30 वर्षीय आकाश आनंद को बसपा के युवा नेताओं में गिना जाता है, लेकिन बार-बार मिलने वाले झटकों से उनकी राजनीतिक राह मुश्किल होती दिख रही है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब उनसे कोई पद वापस लिया गया हो। पिछले सवा दो वर्षों में मायावती ने आकाश आनंद को लेकर छह बार अपने रुख में बदलाव किया है, जिन्हें ‘यू-टर्न’ के रूप में देखा जा रहा है।
मायावती द्वारा आकाश आनंद पर लिए गए इन फैसलों ने पार्टी के नेताओं और समर्थकों के बीच भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। हाल ही में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, आकाश आनंद को चुनाव प्रचार की कमान सौंपी गई थी। उन्होंने हाथरस से बसपा के चुनाव प्रचार का शुभारंभ किया था और इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखे हमले बोले थे। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहकर संबोधित किया था, यह कहते हुए कि उनकी उम्र 30 वर्ष है जबकि अखिलेश यादव लगभग 50 वर्ष के हैं। उन्होंने बीजेपी को शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर घेरा था। उनकी आक्रामक शैली के कारण उनके भाषण अक्सर वायरल होते रहे हैं। इससे पहले, 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने कई जनसभाओं को संबोधित किया था। मई 2024 में सीतापुर की एक जनसभा में उनके आक्रामक भाषण के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद मायावती ने उन्हें पार्टी से हटा दिया था। अब एक बार फिर से आकाश आनंद पर यह कार्रवाई हुई है।
इस तरह के राजनीतिक उतार-चढ़ाव का सीधा असर पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ सकता है, खासकर जब नेतृत्व में बार-बार बदलाव की स्थिति बनती है।
