मायावती का फैसला: आकाश आनंद अभी बड़ी जिम्मेदारी के लिए अपरिपक्व, BSP में फिर बदला नेतृत्व
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारियों से दूर कर दिया है। मायावती ने आकाश आनंद को फिलहाल नेशनल कोर्डिनेटर के पद से हटा दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि पार्टी में उनका नंबर दो का रुतबा फिलहाल समाप्त हो गया है। मायावती के इस फैसले का असर पार्टी की अंदरूनी राजनीति पर पड़ सकता है, क्योंकि आकाश आनंद को मायावती का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है।
मायावती ने आकाश आनंद को राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि वह बसपा संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों का पालन कर रही हैं, जिनके अनुसार परिवार के सदस्यों को पार्टी में शामिल तो किया जा सकता है, लेकिन उन्हें बड़े पद या चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं थी। मायावती का मानना है कि आकाश को अभी और अनुभव की जरूरत है ताकि विरोधी दल किसी भी तरह का राजनीतिक नुकसान न पहुंचा सकें।
यह पहली बार नहीं है जब आकाश आनंद को पार्टी में अहम जिम्मेदारी दी गई हो और बाद में वापस ले ली गई हो। वर्ष 2019 में उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था और उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में कई जनसभाओं को संबोधित किया था। मई 2024 में उनके एक आक्रामक भाषण के बाद उन पर मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसके बाद मायावती ने उन्हें पार्टी से हटा दिया था। हालांकि, बाद में उनकी वापसी हुई। मार्च 2025 में उन्हें फिर से निष्कासित किया गया था, लेकिन अगस्त 2025 में उन्हें राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी फिर से सौंपी गई थी। हाल ही में हाथरस में उन्होंने चुनावी रैली को संबोधित किया था।
इस बीच, मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर भी निशाना साधा। लखनऊ में पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में उन्होंने कहा कि जातिवाद, असमानता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आरएसएस की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने आरएसएस से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करने की सलाह दी।
बैठक में मायावती ने संगठन को मजबूत करने, कमियों को दूर करने और पदाधिकारियों को पूरी निष्ठा से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कांशीराम की पुण्यतिथि पर देशभर में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन आंदोलन का मुख्य लक्ष्य है और इसके लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है।
