कानपुर जिले में संचालित पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं बदहाल हैं। सरकार और तेल कंपनियों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरा शौचालय, मुफ्त हवा, प्राथमिक उपचार...
कानपुर जिले में संचालित पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं बदहाल हैं। सरकार और तेल कंपनियों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरा शौचालय, मुफ्त हवा, प्राथमिक उपचार बॉक्स, शिकायत पेटिका, हेल्पलाइन नंबर और अग्निशामक की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसके बावजूद, जिले के लगभग 60 प्रतिशत पेट्रोल पंप इन सुविधाओं के मामले में मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। कई पंपों पर शौचालयों में ताला लटका मिला, तो कहीं हवा भरने की मशीनें खराब पाई गईं। कुछ स्थानों पर शिकायत पेटिका और हेल्पलाइन नंबर तक उपलब्ध नहीं थे। रनियां-सरवनखेड़ा क्षेत्र में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहाँ रायपुर-गजनेर मार्ग और रनियां-मैथा मार्ग पर कई पेट्रोल पंपों पर इन आवश्यक सुविधाओं का घोर अभाव देखा गया। मुफ्त हवा के बोर्ड तो लगे थे, लेकिन मशीनें या तो खराब थीं या उन्हें संचालित करने के लिए कर्मचारी उपलब्ध नहीं थे। उपभोक्ताओं को ठंडा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के बजाय सामान्य पानी से ही काम चलाया जा रहा है।
पेट्रोल-डीजल की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए फिल्टर पेपर और प्रमाणित माप की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन कई पंपों पर फिल्टर पेपर उपलब्ध नहीं मिले। पांच या दस लीटर के प्रमाणित माप से ग्राहक अपनी डिलीवरी की जांच करने में असमर्थ हैं, जिससे उपभोक्ताओं के मन में पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। रसीदें भी अक्सर मांगने पर ही दी जाती हैं।
आग से बचाव के लिए रेत से भरी बाल्टियां और अग्निशमन उपकरण भी कई पंपों पर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिले। निरीक्षण के दौरान बाल्टियां तो मिलीं, लेकिन उनमें रेत की मात्रा मानक के अनुरूप नहीं थी। प्राथमिक उपचार बॉक्स, टेलीफोन, सुझाव पुस्तिका और शिकायत पेटिकाएं भी कई पंपों पर मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं। ऐसी स्थिति में, किसी भी आपातकालीन स्थिति में इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगता है।
जिला आपूर्ति अधिकारी (डीएसओ) अभिषेक कुरील ने आश्वासन दिया है कि शिकायत मिलने पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि क्या जिम्मेदार विभाग केवल शिकायतों का इंतजार करेगा, या नियमित निरीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित करेगा कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को सभी आवश्यक सुविधाएं मिलें। यह स्थिति आम जनता के लिए असुविधाजनक है और उनके अधिकारों के हनन का संकेत देती है।