सावन में मछली खाना पाप नहीं, निषाद समाज का पारंपरिक भोजन: संजय निषाद
अयोध्या में कांग्रेस के निषाद सम्मेलन में मछली भोज को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज के लिए मछली पारंपरिक भोजन है और इसे खाना पाप नहीं है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे स्वयं भी सावन के महीने में मछली का सेवन करते हैं।
संजय निषाद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वे मछुआरों को मछली के बहाने फंसाना चाहते हैं, लेकिन निषाद समाज अब कांग्रेस के बहकावे में नहीं आएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता अजय राय मछली खाकर मंदिर क्यों गए। मंत्री के अनुसार, भाजपा ने अजय राय द्वारा मछली खिलाए जाने पर सवाल उठाया है, न कि निषाद समाज के मछली खाने पर। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता एक तरफ धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तो दूसरी तरफ मछली खाते हैं, जो कि दोहरा आचरण है।
मंत्री ने निषाद समाज की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने उनकी जमीनें छीन लीं और उनके पास अनाज की कमी है, ऐसे में वे मछली खाकर ही जीवित रहेंगे। उन्होंने सावन में मछली न खाने के पीछे एक अलग तर्क भी दिया कि यह मछलियों के प्रजनन का समय होता है, जिससे उनकी संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ विशेष प्रकार की मछलियों को खाने की छूट है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस ने अयोध्या में एक निषाद सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें मछली परोसी गई। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर दोहरा आचरण करने का आरोप लगाया। जवाब में अजय राय ने चुनौती दी कि यदि उनके मछली खाने का कोई प्रमाण है तो वे इस्तीफा दे देंगे।
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