कानपुर में अधिवक्ताओं ने थानों में सुनवाई पर जताई आपत्ति, न्यायिक सुधार की मांग
कानपुर में सोमवार को राम अवतार महाना हॉल में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दो प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिन्हें अधिवक्ताओं के प्रादेशिक सम्मेलन में रखा जाएगा। अधिवक्ताओं ने अदालतों के बजाय थानों में मुकदमों की सुनवाई होने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि जमानत के लिए अलग-अलग थानों के चक्कर काटना समय और धन की बर्बादी है। यह स्थिति न्याय की मंशा के विपरीत है, जहां पुलिस का एक अधिकारी पकड़ता है और दूसरा सुनवाई करता है। इसके अतिरिक्त, किरायेदारी अधिनियम के तहत आने वाले मुकदमों की सुनवाई को भी प्रशासनिक क्षेत्राधिकार से हटाकर न्यायिक क्षेत्राधिकार में शामिल करने की मांग उठी।
अधिवक्ताओं का तर्क था कि प्रशासनिक अधिकारी अक्सर नियमों को ताक पर रखकर मनमाफिक फैसले सुनाते हैं। यह तय हुआ कि 10 और 11 सितंबर को होने वाले प्रादेशिक सम्मेलन में शांतिभंग के मुकदमों की पुलिस द्वारा की जा रही सुनवाई और किरायेदारी अधिनियम के मुकदमों की प्रशासनिक सुनवाई के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। इस बैठक में बार व लॉयर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी और कई वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे।
इस तरह के न्यायिक सुधारों की मांग आम जनता के लिए न्याय प्रक्रिया को अधिक सुलभ और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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