पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के हमले होंगे कम, 66 किमी लंबी चेन फेंसिंग का काम पूरा: Pilibhit Tiger Reserve news
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) में मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए 66.92 किलोमीटर लंबी चेन फेंसिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना पर लगभग 19.66 करोड़ रुपये का खर्च आया है, जिसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों को वन क्षेत्र से बाहर आने से रोकना और स्थानीय आबादी को सुरक्षित रखना है। यह कदम क्षेत्र में बढ़ती बाघों की संख्या और उनके बाहर निकलने से उत्पन्न होने वाले खतरों को कम करने में सहायक होगा, जिससे स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व, जो 73,000 वर्ग हेक्टेयर में फैला हुआ है, बाघों के लिए एक आदर्श प्राकृतिक आवास माना जाता है। यहां हिरण, जंगली सुअर और नीलगाय जैसे शिकार के लिए पर्याप्त वन्यजीव उपलब्ध हैं, साथ ही नहरों से पानी भी आसानी से मिल जाता है, जिससे बाघों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। हालांकि, इस वृद्धि के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं, जिससे आसपास के 15 व्यक्तियों की जान चली गई और मानवीय गतिविधियां नकारात्मक रूप से प्रभावित हुईं।
इन घटनाओं के मद्देनजर, PTR प्रशासन ने सीमावर्ती 72 गांवों में जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए। वर्ष 2016-17 से 2019-20 तक 51 किलोमीटर क्षेत्र में सोलर तार फेंसिंग भी कराई गई थी, लेकिन यह उतनी कारगर साबित नहीं हुई। इसके बाद, टाइगर कंजर्वेशन प्लान के तहत वर्ष 2020-21 से मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में चेनलिंक फेंसिंग का कार्य शुरू किया गया।
यह फेंसिंग बराही रेंज में 8 किलोमीटर और 10.5 किलोमीटर, महोफ रेंज में 24.5 किलोमीटर और माला रेंज में 32 किलोमीटर क्षेत्र में की गई है। कुल 19.66 करोड़ रुपये की लागत से यह कार्य आपदा राहत कोष और कैंपा योजना के अंतर्गत विभिन्न वित्तीय वर्षों में पूरा किया गया। इसमें वित्त वर्ष 2020-21 में 13.05 किलोमीटर (2.23 करोड़ रुपये), 2022-23 में 3.87 किलोमीटर (1.12 करोड़ रुपये), 2023-24 में 25 किलोमीटर (7.76 करोड़ रुपये) और 2024-25 में 25 किलोमीटर (8.55 करोड़ रुपये) का काम शामिल है।
अभी भी पीटीआर के हरीपुर और दियोरिया रेंज में फेंसिंग का काम नहीं हुआ है। साथ ही, माला और महोफ क्षेत्र का बांस खेड़ा इलाका भी बचा हुआ है, जिसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। डीएफओ पीटीआर मनीष सिंह के अनुसार, बाघ संरक्षण कार्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और निर्देशों के अनुरूप ही किया जा रहा है। यह पहल स्थानीय निवासियों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने और वन्यजीवों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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