यूपी रेरा के नए नियम: बिल्डर से खरीदार तक जवाबदेही तय, रियल एस्टेट नियमों का सरलीकरण
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी-रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से नियमों को सुव्यवस्थित किया है। प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियम, 2019 को 13 जुलाई 2026 तक किए गए 12 महत्वपूर्ण संशोधनों के साथ पुनः प्रकाशित किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बिल्डरों, खरीदारों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए नियमों को अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाना है, जिससे रियल एस्टेट उद्योग में विश्वास बढ़े।
नए नियमों के तहत, बिल्डरों को प्रत्येक परियोजना के लिए तीन अलग-अलग बैंक खाते बनाए रखने होंगे। खरीदारों से प्राप्त कुल राशि का 70% एक समर्पित खाते में और शेष 30% एक लेन-देन खाते में जमा किया जाएगा। परियोजना से संबंधित किसी भी ऋण की राशि को एक अलग खाते में रखा जाएगा। इन सभी खातों का प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऑडिट कराना अनिवार्य होगा और ऑडिट रिपोर्ट को प्राधिकरण की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि खरीदारों के पैसे का उपयोग केवल परियोजना के विकास के लिए हो और किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोका जा सके।
विज्ञापन और परियोजना की जानकारी के संबंध में भी कड़े नियम लागू किए गए हैं। अब सभी विज्ञापनों में रेरा पंजीकरण संख्या, परियोजना की वेबसाइट और एक क्यूआर कोड का उल्लेख अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, परियोजना के संग्रह खाते, शुभारंभ की तारीख और एजेंट का पंजीकरण नंबर भी स्पष्ट रूप से बताना होगा। स्वीकृत नक्शे में दर्ज नाम के अलावा किसी अन्य नाम से परियोजना का विपणन नहीं किया जा सकेगा। कब्जा सौंपते समय, बिल्डर को निर्धारित प्रारूप में एक कब्ज़ा प्रस्ताव देना होगा। परियोजना के वास्तुकार, अभियंता, चार्टर्ड अकाउंटेंट और ग्राहक संबंध प्रबंधक जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी खरीदारों को उपलब्ध करानी होगी।
गैर-पंजीकृत परियोजनाओं में मकान या भूखंड खरीदने वाले खरीदारों को भी अब राहत मिली है। वे अब यूपी-रेरा की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायत के साथ, उन्हें परियोजना और संबंधित बिल्डर से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रदान करनी होगी, जिससे प्राधिकरण को मामले की जांच करने में आसानी होगी।
नियमों के अनुपालन में देरी पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट जमा करने में देरी पर 15,000 रुपये, सालाना लेखा-परीक्षण रिपोर्ट में देरी पर 25,000 रुपये और एजेंट की त्रैमासिक रिपोर्ट देर से देने पर 10,000 रुपये का शुल्क लगाया जाएगा। यह विलंब को हतोत्साहित करेगा और समय पर अनुपालन सुनिश्चित करेगा।
आवंटी की मृत्यु की स्थिति में, परिवार के सदस्य के नाम फ्लैट या भूखंड हस्तांतरित करने के लिए अधिकतम 1,000 रुपये का मामूली शुल्क लगेगा। हालांकि, परिवार से बाहर किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरण के लिए अधिकतम 25,000 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।
रियल एस्टेट एजेंटों के लिए, पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र प्राप्त करना आवश्यक होगा। उन्हें अपने अभिलेखों को व्यवस्थित रखना होगा और हर तीन महीने में अपने लेन-देन की रिपोर्ट जमा करनी होगी।
रखरखाव के लिए जमा की गई राशि को एक अलग खाते में सुरक्षित रखा जाएगा। जब साझा क्षेत्रों की जिम्मेदारी आवंटियों की संस्था को सौंपी जाएगी, तो यह पूरी राशि उन्हें हस्तांतरित कर दी जाएगी। इस राशि का उपयोग केवल साझा क्षेत्रों और सुविधाओं के रखरखाव, मरम्मत और आवश्यक बदलावों के लिए किया जा सकेगा, और इसका लेखा-परीक्षण भी अनिवार्य होगा। इसके अलावा, परियोजना पंजीकरण को बढ़ाने, वापस लेने या जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे प्रमोटर को जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रियाओं को भी स्पष्ट किया गया है। ये सभी समेकित नियम अब प्राधिकरण की वेबसाइट के विधिक अनुभाग में उपलब्ध हैं, जिससे सभी हितधारकों के लिए जानकारी सुलभ हो गई है।
