एलडीए की लापरवाही: 2 लाख का मुआवजा बढ़कर 27 लाख हुआ, कोर्ट ने लगाया जुर्माना (LDA compensation)
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की लापरवाही के कारण एक भूमि अधिग्रहण मामले में मुआवजा राशि 2 लाख रुपये से बढ़कर 27 लाख रुपये हो गई है। यह मामला उजरियांव गांव की आवासीय योजना से संबंधित है, जहां 1997 में कोर्ट ने दो लाख रुपये 15 प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया था। एलडीए ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसे 3 मार्च 2020 को निरस्त कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद मुआवजा अब तक नहीं दिया गया। इस तरह की देरी से न केवल नागरिकों को परेशानी होती है, बल्कि सरकारी तंत्र पर भी सवाल उठते हैं।
भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण (लारा) कोर्ट ने इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए एलडीए के विहित पदाधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। लारा कोर्ट के पीठासीन अधिकारी हरेंद्र बहादुर सिंह ने एलडीए को आदेश की प्रति भेजते हुए निर्देश दिया है कि हर्जाने की पूरी रकम वसूल कर जमा कराई जाए। अदालत ने 13 मार्च को मूलवाद के साथ इस मामले को प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि देय धनराशि का जमा न करना एक गंभीर स्थिति उत्पन्न करता है। 1997 में डिक्री धारक निर्मला सिंह को लगभग दो लाख रुपये का भुगतान किया जाना था, जो 15% साधारण ब्याज की दर से अब 27 लाख रुपये तक पहुँच गया है। यह मामला सरकारी विभागों में लंबित पड़े मुकदमों और उनके निपटारे में होने वाली देरी को उजागर करता है, जिससे आम जनता को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
