नई श्रम संहिता: 40 करोड़ श्रमिकों की बल्ले-बल्ले, वेतन में होगी बड़ी बढ़ोतरी
नई श्रम संहिता के प्रभावी होने से देश के 40 करोड़ से अधिक असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार आने की प्रबल संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इस संहिता के लागू होने के बाद श्रमिकों के वेतन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होगी, जिससे न केवल उनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक अनुमान के मुताबिक, इस नई व्यवस्था के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के दैनिक वेतन में लगभग 95 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है, जो प्रतिमाह करीब 3000 रुपये के बराबर है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में यह बढ़ोतरी उनकी उपभोग क्षमता को बढ़ाएगी, जिसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था को एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि श्रमिकों की मजदूरी और ग्रेच्युटी नियमों में बदलाव के कारण प्रतिष्ठानों की परिचालन लागत में वृद्धि हो सकती है।
वर्तमान में ग्रेच्युटी का लाभ पाने के लिए कम से कम पांच साल की निरंतर सेवा अनिवार्य है। लेकिन, नई श्रम संहिता के लागू होने पर अनुबंध पर काम करने वाले श्रमिक भी एक वर्ष की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। इसके अलावा, ग्रेच्युटी की गणना अब केवल मूल वेतन के आधार पर नहीं, बल्कि कुल वेतन के आधार पर की जाएगी। स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने से भी प्रतिष्ठानों पर वित्तीय बोझ बढ़ने की आशंका है।
एक महत्वपूर्ण प्रावधान के तहत, केंद्र सरकार देश भर के श्रमिकों के लिए एक समान ‘फ्लोर वेज’ यानी न्यूनतम मजदूरी दर तय करने जा रही है। इसका मतलब है कि कोई भी राज्य अपने श्रमिकों को इस निर्धारित फ्लोर वेज से कम वेतन का भुगतान नहीं कर सकेगा। यह नियम कार्यालयों, दुकानों और अन्य निजी प्रतिष्ठानों में काम करने वाले सभी प्रकार के श्रमिकों पर लागू होगा। उम्मीद है कि अगले तीन महीनों के भीतर यह फ्लोर वेज तय कर लिया जाएगा।
वर्तमान में, विभिन्न राज्यों में न्यूनतम मजदूरी की दरें काफी भिन्न हैं। उदाहरण के लिए, कुछ राज्यों में गैर-कुशल श्रमिकों के लिए मासिक न्यूनतम मजदूरी 8000 रुपये से भी कम है, जबकि बिहार, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह 11,000-12,000 रुपये के बीच है। वहीं, दिल्ली जैसे महानगरों में यह 18,000 रुपये से अधिक है। केंद्र द्वारा फ्लोर वेज तय किए जाने के बाद, देश भर में न्यूनतम मजदूरी की दरों में एकरूपता आने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, नीति आयोग के एक सदस्य के अनुसार, अब सभी प्रकार के श्रमिकों को नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य होगा, जिससे उनकी रोजगार की स्थिति और अधिकारों को अधिक स्पष्टता मिलेगी।
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