दिल्ली में अंतिम संस्कार अब सिर्फ गोबर के कंडों से, लकड़ी पर MCD का प्रतिबंध
दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने एक महत्वपूर्ण और पर्यावरण-हितैषी निर्णय लिया है। निगम ने अब राजधानी के चार प्रमुख श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की जगह पूरी तरह से गाय के गोबर से बने कंडों (उपलों) के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है। इस आदेश का उद्देश्य शहर में वायु गुणवत्ता में सुधार लाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
इस संबंध में, निगम के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि इन चार श्मशान घाटों में केवल गोबर के कंडों का ही उपयोग हो। स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन सत्या शर्मा ने एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में निगम से विस्तार (एक्सटेंशन) प्राप्त करने वाली श्मशान घाट प्रबंधन संस्थाओं को यह साबित करना होगा कि वे दाह संस्कार के लिए पूर्णतः गाय के गोबर के कंडों का ही प्रयोग कर रही हैं।
सत्या शर्मा ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक साफ, पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रिया को बढ़ावा देगा। उन्होंने निगम से गोबर के कंडे और दाह संस्कार के लिए लकड़ी के लट्ठों के निर्माण हेतु गोबर के कंडों में मशीनरी स्थापित करने का आग्रह किया। निगम भविष्य में इस कार्य के लिए मशीनें लगाने की व्यवस्था करेगा। इसके अतिरिक्त, डेयरियों को भी गाय के गोबर के उपले बनाने को अनिवार्य किया जाना चाहिए और पशु चिकित्सा विभाग को ऐसे नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस पहल से न केवल पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह एक स्वच्छ और पारंपरिक दाह संस्कार पद्धति को भी प्रोत्साहित करेगा। संबंधित विभागों को इन निर्णयों को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह उल्लेखनीय है कि पंचकुइंया रोड श्मशान घाट और निगम बोध श्मशान घाट जैसे कुछ स्थानों पर पहले से ही लकड़ी के साथ गोबर के कंडों का सीमित उपयोग किया जा रहा है, ताकि लकड़ी की खपत कम हो सके। हालांकि, केवल गोबर के कंडों से दाह संस्कार की सुविधा अभी तक कहीं भी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं है। दिल्ली में प्रतिवर्ष औसतन 300 से 400 दाह संस्कार होते हैं, जिनमें प्रत्येक में लगभग 500-700 किलोग्राम लकड़ी की खपत होती है। इस नई नीति से लकड़ी की खपत में भारी कमी आने की उम्मीद है।
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