लखनऊ में शराब कारोबारी की हत्या: बेटे ने कबूला जुर्म, बोला- ‘नशे में पिता ने पीटा, सो गए तो मैंने मार दिया’ | Lucknow crime
लखनऊ के आशियाना स्थित बंगला बाजार में शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने उनके बेटे अक्षत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। दो दिनों की गहन पूछताछ के बाद अक्षत ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिससे Lucknow crime की यह गुत्थी सुलझ गई। अक्षत ने पुलिस को बताया कि उसने अपने पिता की हत्या इसलिए की क्योंकि वे नशे में उसे पीटते थे और जान से मारने की धमकी देते थे।
बेटे का कबूलनामा: ‘न मारता तो किसी दिन मुझे मार देते’
जेल जाने से पहले अक्षत ने आशियाना थाने में पुलिस को बताया कि 19 फरवरी की रात उसके पिता मानवेंद्र सिंह नशे में धुत थे। उन्होंने गाली-गलौज करते हुए अक्षत की पिटाई की और जान से मारने की नीयत से राइफल तान दी। अक्षत और उसकी बहन ने किसी तरह उन्हें शांत कराया। इसके बाद मानवेंद्र सिंह राइफल बेड पर रखकर सो गए। अक्षत ने बताया कि रात भर उसके मन में पिता के प्रति गहरा आक्रोश भरा रहा, क्योंकि उन्हीं की वजह से उसकी मां ने भी अपनी जान दी थी। सारी रात उहापोह में बीत गई। तड़के जब उसे कुछ समझ नहीं आया, तो उसने राइफल उठाई और गोली मारकर पिता का सिर उड़ा दिया। वारदात के बाद वह फूट-फूटकर रोया और ‘सॉरी, गलती हो गई’ कहता रहा। उसने यह भी स्पष्ट किया कि इस हत्या में उसकी बहन या किसी अन्य का कोई दोष नहीं है।
NEET के दबाव और मारपीट से था परेशान
एसीपी कैंट अभय प्रताप मल्ल ने बताया कि पूछताछ में अक्षत ने पुरानी बातें दोहराईं। उसने बताया कि उसके पिता उस पर NEET की तैयारी का दबाव बना रहे थे, जबकि उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता था। इस बात पर पिता अक्सर नाराज रहते थे और मारपीट करते थे। अक्षत ने यह भी कबूला कि पिता की हत्या के बाद उसने बहन कृति को डरा-धमकाकर कमरे में बंद कर दिया था। उसने ब्लिंकिट से ऑनलाइन दो चाकू मंगवाए और 20 फरवरी को जब बहन परीक्षा देने गई, तो वह बाहर निकला। उसने आरी और ड्रम खरीदा, फिर पिता के शव के हाथ-पैर काटे। धड़ को ड्रम में भरकर और हाथ-पैर एक बैग में रखकर कार में रखे। बाद में खून से सने कपड़े और शरीर के कटे हुए अंग सदरौना नहर के पास झाड़ियों में छिपा दिए। पुलिस ने कटे हुए अंग और वारदात में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लिए हैं, जिनमें एक राइफल, तीन खोखा कारतूस, एक जिंदा कारतूस, एक कारतूस की पेटी, खून के धब्बे लगे कपड़े, दो आरी ब्लेड, एक नीला ड्रम, दो चाकू, एक खून लगी रजाई, एक कालीन, दो चादर और बुलेट का टुकड़ा शामिल है।
अंतिम संस्कार और बहन से मुलाकात
पोस्टमार्टम के बाद बुधवार सुबह मानवेंद्र का शव बंगला बाजार स्थित घर लाया गया, जहां बड़ी संख्या में परिवारीजन और रिश्तेदार मौजूद थे। बाद में शव बैकुंठ धाम ले जाया गया, जहां भतीजे कृत प्रताप सिंह ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। मानवेंद्र के पिता अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए, क्योंकि उनके यहां ऐसी परंपरा नहीं है कि पिता बेटे की अर्थी को कंधा दें या अंत्येष्टि में शामिल हों। जेल जाने से पहले अक्षत ने पुलिस से अपनी बहन से मिलने की इच्छा जताई। पुलिस ने परीक्षा देकर लौटी उसकी बहन को थाने बुलाया। पूछताछ के बाद अक्षत ने बहन से कहा, ‘अपना ख्याल रखना’, जिसे सुनकर बहन भी रोने लगी।
मोहल्ले में चर्चा: हत्या की वजह बनी ‘वह महिला’?
मोहल्ले के लोग आपस में चर्चा करते रहे कि आखिर वह महिला कौन थी, जिससे मानवेंद्र की करीबी थी और जो इस हत्या की वजह बनी। मोहल्ले वालों ने बताया कि वे उस महिला के बारे में पूरी तरह से नहीं जानते, लेकिन अक्सर उसी महिला को लेकर पिता-पुत्र में झगड़ा होता था।
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