वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण में चूक, 668 संपत्तियां ट्रिब्यूनल के भरोसे
बहराइच में वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण के लिए शुरू किए गए उम्मीद पोर्टल पर आखिरी तारीख 5 दिसंबर तक 668 वक्फ संपत्तियों का ब्योरा दर्ज नहीं हो सका। अब इन संपत्तियों के पंजीकरण के लिए संबंधितों को वक्फ ट्रिब्यूनल (एक विशेष न्यायिक निकाय) में संपर्क करना होगा।
लोकसभा में वक्फ संशोधन कानून-2025 में पारित होने के बाद केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों का ब्योरा मांगा था। जिले में सुन्नी और शिया समुदाय की कुल 2,278 वक्फ संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने के लिए सरकार ने उम्मीद पोर्टल पर 5 दिसंबर तक पंजीकरण कराने के निर्देश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को दिए थे।
विभाग ने इसके लिए प्रचार-प्रसार के साथ बैठकें भी कीं, लेकिन समय सीमा के अंदर मात्र 1610 वक्फ संपत्तियां ही पोर्टल पर दर्ज हो सकी हैं। इनमें सुन्नी समुदाय की 1551 और शिया समुदाय की 59 संपत्तियां शामिल हैं। शेष 668 संपत्तियों ने पंजीकरण क्यों नहीं किया? इस पर विभाग पोर्टल में बाधा आने की बात कह रहा है। पंजीकरण की तिथि न बढ़ी तो शेष बची वक्फ संपत्तियों के जिम्मेदारों को वक्फ ट्रिब्यूनल का सहारा लेना पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि वक्फ संपत्तियों की देखरेख करने वाले प्रबंधक या व्यवस्थापक ने पोर्टल पर पंजीकरण से संबंधित कोई कार्रवाई शुरू की है, लेकिन पूरी नहीं हुई है तो उन्हें तीन माह का समय मिलेगा और किसी प्रकार का दंड नहीं लगेगा। पंजीकरण न कराने वालों को ट्रिब्यूनल में ही जाना पड़ सकता है।
जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मुहम्मद खालिद ने बताया कि उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की समय सीमा बीत गई है। 1610 संपत्तियां ही दर्ज हो पाई हैं। आगे जैसा आदेश आएगा, अनुपालन कराया जाएगा।
