मध्यपूर्व युद्ध और LPG किल्लत: इंडक्शन के दौर में स्टोव की बढ़ी मांग, मिट्टी तेल वितरण पर सरकार का फैसला
मध्यपूर्व में चल रहा युद्ध और उसके परिणामस्वरूप एलपीजी गैस की किल्लत ने लोगों को आधुनिक इंडक्शन कुकटॉप के दौर में भी पुराने मिट्टी के तेल वाले स्टोव की याद दिला दी है। साल 2020 में राशन की दुकानों से मिट्टी के तेल का वितरण पूरी तरह बंद कर दिया गया था, लेकिन अब सरकार ने एक बार फिर इसके वितरण का फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद बाजार में मिट्टी के तेल से चलने वाले स्टोव की मांग में अचानक वृद्धि होने की संभावना है, हालांकि वर्षों पहले कई स्टोव निर्माताओं ने इसका उत्पादन बंद कर दिया था।
सरकार के मिट्टी तेल वितरण के निर्देश के बाद यह विषय सोशल मीडिया पर भी चर्चा का केंद्र बन गया है। यह स्थिति विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए हैरान करने वाली है, जो गैस चूल्हे के अलावा अन्य खाना पकाने के तरीकों से अनभिज्ञ है। यह घटना 90 के दशक से पहले की उन तस्वीरों को भी ताजा करती है जब पीतल या लोहे के चमकदार स्टोव रसोई का अहम हिस्सा हुआ करते थे। आज जहां एक बटन दबाकर नीली लौ पर खाना पकाया जाता है, वहीं पहले स्टोव जलाना भी एक कला थी। इसमें पहले स्टोव की टंकी में मिट्टी का तेल भरना, फिर पंप से हवा भरना और हैंडिल को ऊपर-नीचे करने से आती खट-खट की आवाज, यह सब एक अनुभव था। जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) सत्यवीर सिंह ने बताया कि मिट्टी के तेल के वितरण को लेकर मुख्यालय से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उसके अनुरूप वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
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