माया नगर सहकारी समिति घोटाला: प्रशासन ने कसा शिकंजा, हाईकोर्ट में भी होगी घेराबंदी
मुरादाबाद की माया नगर सहकारी आवास समिति में लंबे समय से चल रही अनियमितताओं, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और पदाधिकारियों की मनमानी के बाद अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। विस्तृत जांच और विभागीय रिपोर्टों के आधार पर समिति पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
समिति के बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है और सभी योजनाओं में जमीन की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लागू है। समिति के कुछ डायरेक्टर कार्रवाई से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहे थे। इससे पहले ही प्रशासक विनय पांडेय के निर्देश पर सहकारी अधिकारी सतीश द्विवेदी ने हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करा दी है। इससे यह साफ हो गया है कि समिति के पदाधिकारी अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं तो प्रशासक पक्ष को भी सुना जाएगा।
पूरा मामला उप्र, सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धारा 38 के तहत चला है। निबंधक स्तर से सचिव को हटाने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके थे, लेकिन प्रबंध कमेटी ने आदेशों की अवहेलना करती रही। इसके बाद सुनवाई की कई तिथियां तय हुईं। मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा, जहां 17 जुलाई 2025 को न्यायालय के आदेश के अनुपालन में दोबारा सुनवाई कराई गई। अंततः छह अक्टूबर 2025 को सचिव नवनीत कुमार शर्मा को दोषी मानते हुए पद से हटा दिया गया।
इसी दौरान सहकारी अधिकारी (आवास) सतीश कुमार द्विवेदी की रिपोर्ट में समिति के खिलाफ अवैध रूप से संचालित व्यावसायिक गतिविधियों का खुलासा हुआ। बताया गया कि दिल्ली रोड स्थित समिति की जमीन पर नियमों के विपरीत फैक्ट्रियों का निर्माण करा दिया गया और व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। इस पर संज्ञान लेते हुए विभाग ने दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही डीएम से समिति की सभी योजनाओं, खासकर फाजलपुर लकड़ी क्षेत्र की जमीन का लैंड आडिट कराने का अनुरोध किया गया है।
सबसे अहम कदम यह रहा कि समिति के सभी बैंक खातों के संचालन पर रोक लगा दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार का वित्तीय हेरफेर आगे न हो सके। बताया जा रहा है कि बदनामी और कार्रवाई के बाद पूर्व विधायक फूलकुंवर के इस्तीफे के बाद नए सिरे से चुनाव कराने का दावा किया गया था। चुनाव के बाद एमपी सिंह को अध्यक्ष चुना गया, लेकिन समिति भंग होने की स्थिति में भी वही स्वयं को अध्यक्ष बताते रहे हैं। अब समिति के कुछ जिम्मेदार समिति भंग किए जाने के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसे लेकर एक गोपनीय बैठक भी होने की चर्चा है। हालांकि प्रशासन ने इस संभावित कानूनी चाल को भांपते हुए पहले ही हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करा दी है, ताकि एकतरफा कोई आदेश न हो सके।
अब समिति में प्रशासक और उनकी टीम जांच को अंतिम रूप देंगे और उसके बाद नियमानुसार चुनाव भी होगा। चुनाव के बाद नई प्रबंध कमेटी गठित होगी और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासक के माध्यम से आगे की विधिक कार्रवाई भी कराई जाएगी। इस मामले में जनता के पैसे के दुरुपयोग का आरोप है, जिससे आम नागरिकों के वित्तीय हितों पर सीधा असर पड़ सकता है।
