मोहम्मद यूनुस के अल कायदा से तार जुड़े होने का दावा, अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग
बांग्लादेश के एक प्रमुख साप्ताहिक अखबार ने पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के हवाले से दावा किया है कि अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के तार दुर्दांत आतंकवादी संगठन अल कायदा से जुड़े हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यूनुस की माइक्रोफाइनेंस संस्था, जिसे ग्रामीण नेटवर्क के नाम से जाना जाता है, ओसामा बिन लादेन और अल कायदा के बड़े फाइनेंसरों से जुड़ी रही है।
इस गंभीर खुलासे के बाद, मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है। रिपोर्ट में 2003 में प्रकाशित एक अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें अल कायदा के दानकर्ताओं की सूची में यूनुस की संस्था जमील का भी उल्लेख था। इस संस्था के बोर्ड में सऊदी व्यवसायी अब्दुल लतीफ जमील भी शामिल थे, जिन्हें अल कायदा के प्रमुख वित्तपोषकों में से एक माना जाता है।
यह कंपनी, जिसे ग्रामीण-जमील माइक्रोफाइनेंस के नाम से जाना जाता है, 2007 में ग्रामीण फाउंडेशन और अब्दुल लतीफ जमील ग्रुप के संयुक्त उपक्रम के रूप में स्थापित हुई थी। इसका घोषित उद्देश्य अरब दुनिया में गरीबी उन्मूलन और माइक्रोफाइनेंस का विस्तार करना था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह कंपनी साइप्रस में पंजीकृत है और दुबई स्थित एक संस्था से संचालित होती है। हालांकि, कंपनी की वेबसाइट और फेसबुक पेज लंबे समय से निष्क्रिय बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट में जमील परिवार के कुछ सदस्यों के विवादित इतिहास पर भी प्रकाश डाला गया है। इसमें यूसुफ जमील का जिक्र है, जिनके संबंध लंदन के कैसीनो और जेफ्री एपस्टीन की सूची से बताए गए हैं। 2003 में प्रकाशित एक रिपोर्ट पर जमील ने मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था, लेकिन 2006 में ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट को जनहित में बताते हुए अमेरिकी मीडिया के पक्ष में फैसला सुनाया था।
इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में ग्रामीण की कुछ वैश्विक संस्थाओं के मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े तत्वों के साथ कथित संबंधों की भी बात कही गई है। कुछ आरोपों में यह भी कहा गया है कि कर्ज न चुका पाने वाले व्यक्तियों को अवैध अंग व्यापार में धकेला गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इन गंभीर आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा कर दी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
