अमावस्या पर धर्मनगरी में गूंजे भक्ति के जयकारे, आस्था का सैलाब उमड़ा
धर्मनगरी में अमावस्या के पावन अवसर पर आस्था और श्रद्धा की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। विभिन्न देवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा, जिन्होंने अपने आराध्य ठाकुरजी का विधिवत पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना की। नगर के सुप्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर, ठाकुर राधावल्लभ मंदिर, ठाकुर राधा दामोदर मंदिर, सेवाकुंज मंदिर, राधारमण मंदिर, कृष्ण बलराम इस्कॉन मंदिर, रंगनाथ मंदिर, प्रेम मंदिर और ठाकुर राधा सनेहबिहारी मंदिर सहित अनेक मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।
भक्त अपने आराध्य की मनोहारी छवि को निहारकर भाव-विभोर हो रहे थे और उनकी कृपा पाने के लिए आतुर थे। मंदिरों के प्रांगण जयकारों और भक्तिमय भजनों से गूंज उठे। सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों ने अपने इष्टदेव का गुणगान किया और भक्ति के सागर में डुबकी लगाई।
अमावस्या पर पंचकोसीय परिक्रमा का विशेष महत्व है। हजारों श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन करते हुए इस परिक्रमा को पूर्ण किया और पुण्य लाभ अर्जित किया। संपूर्ण परिक्रमा मार्ग ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोषों से जीवंत हो उठा। यह दृश्य आस्था और भक्ति की असीम शक्ति का प्रमाण था।
परंपरा के अनुसार, आस्थावान भक्तों ने अमावस्या के शुभ अवसर पर मंदिर क्षेत्रों में साधु-संतों, भिक्षुओं, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान-पुण्य भी किया। इस दान को सेवा और परोपकार के रूप में देखा गया, जिससे समाज में सकारात्मकता का संचार हुआ। सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष अमावस्या पर भक्तों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक रही, जो धर्मनगरी की आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाता है।
