खरमास से पहले थमेगी शहनाई, 11 दिन पूर्व ही समाप्त होंगी शादियां
इस साल वैवाहिक लग्न की श्रृंखला अपने निर्धारित समय से करीब 11 दिन पहले ही समाप्त हो जाएगी। जहां सामान्यतः खरमास के आरंभ के साथ ही शादियों का सीजन थम जाता है, वहीं इस बार 5 दिसंबर को ही इस सत्र के अंतिम शुभ मुहूर्त संपन्न हो जाएंगे। इसका मुख्य कारण ग्रहों की विशेष स्थिति और उनका गोचर बताया जा रहा है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, 5 दिसंबर को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, लेकिन 6 दिसंबर को मृत्यबाण योग बनने के कारण कोई लग्न नहीं होगी। 7 और 8 दिसंबर को नक्षत्रों का मेल विवाह के लिए अनुकूल नहीं रहेगा। नौ दिसंबर से शुक्र ग्रह का वार्धक्य आरंभ हो जाएगा, जो अगले पांच दिनों तक चलेगा। इसके बाद 11 अगस्त से शुक्र ग्रह अस्त हो जाएंगे, जिससे विवाह संबंधी कार्यों के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं मिलेगा।
शुक्र के अस्त होने के ठीक पांच दिन बाद, यानी 16 दिसंबर से खरमास का आरंभ हो जाएगा। मान्यताओं के अनुसार, खरमास के दौरान सूर्य की स्थिति को देखते हुए विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्यों को करना वर्जित माना जाता है। यह खरमास 14 जनवरी 2026 की रात 9:39 बजे समाप्त होगा, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे और उत्तरायण होंगे।
हालांकि, खरमास की समाप्ति के तुरंत बाद भी वैवाहिक लग्न शुरू नहीं होंगी। सूत्रों के अनुसार, खरमास समाप्त होने के बाद भी करीब 20 दिनों तक लग्न की प्रतीक्षा करनी होगी। इसका कारण यह है कि शुक्र ग्रह तब भी अस्त अवस्था में ही रहेगा। शुक्र का उदय 1 फरवरी को होगा, लेकिन उस समय शुक्र बाल्यावस्था में होंगे। चार फरवरी की शाम को शुक्र को बाल्यावस्था से पूर्ण निवृत्ति मिलेगी और उसी दिन से एक बार फिर वैवाहिक लग्न का शुभारंभ होगा। इस प्रकार, शहनाई की गूंज फरवरी 2025 तक सुनाई नहीं देगी।
