KGMU धर्मांतरण केस: आगरा और बस्ती के डॉक्टर भी गैंग में शामिल, जांच जारी
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहे धर्मांतरण और यौन शोषण के गिरोह के तार अब आगरा और बस्ती मेडिकल कॉलेज तक पहुंच गए हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियों की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पता चला है कि डॉ. रमीज और इंटर्न आदिल जैसे लोग, जो यौन शोषण के मामले में फरार हैं, कई रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य चिकित्साकर्मियों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह चला रहे थे। इस गिरोह से मौलाना भी जुड़े हुए थे, जो कथित तौर पर हिंदू लड़कियों का शोषण और धर्मांतरण कराने के मकसद से काम कर रहे थे।
जांच एजेंसियों को एक ऐसे संगठन के बारे में भी जानकारी मिली है, जो चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा होने का दावा करता है, लेकिन उसका मुख्य उद्देश्य हिंदू लड़कियों को निशाना बनाना और उनका धर्मांतरण कराना है। इस संगठन से जुड़े तीनों कॉलेजों के कई डॉक्टर और कर्मचारी पुलिस की रडार पर हैं और उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। डॉ. रमीज ने आठ साल पहले आगरा से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और संगठन से जुड़ने के बाद उसने कथित तौर पर आगरा की एक महिला डॉक्टर को प्रेम जाल में फंसाकर उसका शोषण किया, गर्भपात कराया, पीटा और फिर धर्मांतरण कराकर निकाह किया।
खुफिया एजेंसियों को यह भी पता चला है कि पिछले कुछ सालों में आगरा, केजीएमयू और बस्ती मेडिकल कॉलेज के हॉस्टलों में मौलानाओं का आना-जाना बढ़ गया था। ये मौलाना रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को संगठन से जोड़ रहे थे और उन्हें हिंदू महिला डॉक्टरों को टारगेट करने का निर्देश देते थे। इस संबंध में एजेंसियां और पुलिस टीमें अब सबूत इकट्ठा कर रही हैं और जल्द ही संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद है।
हाल ही में केजीएमयू के ब्राउन हॉल में हुई एक तकरीर का वीडियो और कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं, जिनमें टोपी पहने मुस्लिम डॉक्टर और एप्रन पहने छात्र दिखाई दे रहे हैं। भाजपा नेता अभिजात मिश्रा ने इन वीडियो को शेयर कर सवाल उठाए हैं। केजीएमयू प्रशासन ने वायरल वीडियो और तस्वीरों की सत्यता की जांच कराने की बात कही है, लेकिन एजेंसियां और पुलिस मान रही हैं कि केजीएमयू में स्थितियां सामान्य नहीं हैं। हॉस्टलों में आने वाले मौलाना लोगों को संगठन से जोड़कर तकरीर करते थे और जकात (चंदा) इकट्ठा करते थे, जिसका इस्तेमाल संगठन के खर्चों के लिए किया जाता था।
जांच एजेंसियों की तफ्तीश में यह भी सामने आया है कि संगठन से जुड़े लोग हिंदू महिलाओं और लड़कियों का धर्मांतरण कराने को ‘सवाब’ (पुण्य) मानते थे और आपस में इसी तरह बात करते थे।
इसके अतिरिक्त, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के समर्थकों द्वारा केजीएमयू में कथित हंगामे, तोड़फोड़ और महिला डॉक्टरों से अभद्रता के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई जा रही है। केजीएमयू प्रशासन का आरोप है कि समर्थकों ने कुलपति कार्यालय में तोड़फोड़ की और महिला शिक्षकों से अभद्रता की। केजीएमयू प्रशासन ने चौक कोतवाली में तहरीर दी है, लेकिन 24 घंटे बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं होने से डॉक्टरों और कर्मचारियों में आक्रोश है। उन्होंने कामकाज ठप कर हड़ताल की चेतावनी दी है। पुलिस का कहना है कि तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है और वायरल वीडियो व सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की पहचान की जा रही है।
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