कानपुर का पनकी पावर प्लांट अब सीवेज के शोधित पानी से चलेगा, जानें क्या है खास
कानपुर में एक महत्वपूर्ण जल संरक्षण पहल के तहत, पनकी पावर प्लांट अब सीवेज के शोधित पानी से संचालित होगा। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बिनगवां स्थित 40 एमएलडी क्षमता के टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) का निरीक्षण कर इसकी कार्यप्रणाली का जायजा लिया। लगभग 249.92 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस परियोजना से प्राप्त उच्च गुणवत्ता का शोधित जल सीधे पनकी थर्मल पावर प्लांट के कूलिंग टावरों में उपयोग किया जा रहा है।
इस अनूठी परियोजना का उद्देश्य ताजे पानी की खपत को कम करना और किसानों के लिए सिंचाई योग्य जल को सुरक्षित रखना है। बिनगवां स्थित 210 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में सेकेंडरी ट्रीटमेंट के बाद, शोधित सीवेज को टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है। यहां अत्याधुनिक आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) और यूएफ (अल्ट्रा फिल्ट्रेशन) मेम्ब्रेन आधारित तकनीक का उपयोग करके जल को उच्च स्तर पर शुद्ध किया जाता है, जिसकी गुणवत्ता लगभग पेयजल के स्तर तक पहुंच जाती है।
इसके बाद, प्रतिदिन 40 एमएलडी उच्च गुणवत्ता वाला जल 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पनकी थर्मल पावर प्लांट तक पहुंचाया जाता है। यह उत्तर प्रदेश का पहला टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट है जो आरओ और यूएफ मेम्ब्रेन तकनीक पर आधारित है। पावर प्लांट के कूलिंग टावरों और बॉयलर में उच्च गुणवत्ता वाले शोधित जल का उपयोग उपकरणों में स्केलिंग (परत जमना) और जंग लगने जैसी समस्याओं को रोकता है, जिससे संयंत्र की कार्यक्षमता बनी रहती है और रखरखाव लागत कम होती है। यह पहल न केवल औद्योगिक जल प्रबंधन में एक मील का पत्थर है, बल्कि जल संसाधनों के कुशल उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।
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