कानपुर देहात: शुक्ल तालाब, क्रांतिकारियों की शहादत का मूक गवाह, पर्यटन विकास का इंतजार
कानपुर देहात का ऐतिहासिक शुक्ल तालाब, जो 1857 के गदर के दौरान आजादी के सेनानियों की कुर्बानी का गवाह रहा है, आज उपेक्षा का शिकार है। पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित होने के बावजूद, इस महत्वपूर्ण स्थल को पीपी मॉडल पर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पिछले दो वर्षों से अटकी हुई है। यह ऐतिहासिक तालाब न केवल गदर की यादों को संजोए हुए है, बल्कि मुगलकालीन वास्तुकला का भी एक अनूठा नमूना है।
सन 1857 के गदर के दौरान, तात्या टोपे और शाहपुर की रानी के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने फिरंगी सेना को खदेड़ दिया था। गदर के बाद, अंग्रेजी सेना ने शाहपुर की रानी के किले को ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद, 1858 में अंग्रेज अफसर हैवलॉक ने इसी तालाब के पास स्थित बारादरी में अदालत लगाकर शाहपुर की रानी के सात विश्वसनीय क्रांतिकारियों को फांसी की सजा दी थी।
इतिहासकारों के अनुसार, यह तालाब मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में 1578 ईस्वी में अकाल के दौरान बनाया गया था। तत्कालीन दीवान शीतल प्रसाद शुक्ला ने सरकारी धन का उपयोग करके इस भव्य तालाब और मंदिर का निर्माण कराया था। शिकायत के बाद अकबर ने स्वयं यहां आकर जांच की और धन के सदुपयोग को देखकर दोनों अधिकारियों को पुरस्कृत किया। इसी घटना के बाद शहर का नाम शाहपुर से बदलकर अकबरपुर कर दिया गया था।
ट्रक की टक्कर से भट्ठा श्रमिक की दर्दनाक मौत, kanpur accident की जांच जारी
कानपुर देहात: महिला श्रमिक की संदिग्ध मौत, परिजनों ने की हत्या की FIR दर्ज कराने की मांग
कानपुर देहात: फैक्ट्री श्रमिक की संदिग्ध मौत, परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप
कानपुर देहात: फैक्ट्री श्रमिक की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप | Kanpur crime news
