झारखंड बिजली घोटाला: हाई कोर्ट ने कंपनियों से मांगा जवाब, 500 करोड़ के नुकसान का आरोप
झारखंड हाई कोर्ट में बिजली उत्पादन और बिक्री के दौरान इलेक्ट्रिसिटी एक्ट का उल्लंघन कर राज्य सरकार को लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप वाली जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में संबंधित कंपनियों को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया है। इस मामले पर मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
एनर्जी वाच नामक संस्था ने इस संबंध में एक जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मेसर्स अमलगम स्टील्स एंड पावर लिमिटेड और मेसर्स अमलगम स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड, जो आपस में सिस्टर कंपनियां हैं, राज्य में बिजली उत्पादन और बिक्री का कार्य कर रही हैं। इन दोनों कंपनियों पर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के नियमों की अनदेखी करते हुए आपस में ही बिजली की खरीद-बिक्री करने का गंभीर आरोप है। इस कथित अवैध लेनदेन से राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
प्रार्थी का दावा है कि इस अनियमितता के कारण राज्य सरकार को करीब 500 करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा हुआ है। इस मामले में झारखंड सरकार और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) को भी प्रतिवादी बनाया गया है। पूर्व में अदालत के आदेश पर जेबीवीएनएल के महाप्रबंधक द्वारा दाखिल किए गए जवाब में यह बात सामने आई थी कि कंपनियों की इस गड़बड़ी से लगभग 300 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।
दूसरी ओर, कंपनियों की ओर से याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे खारिज करने की मांग की गई है। अदालत इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लेने की दिशा में अग्रसर है। इस प्रकरण से झारखंड के बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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