ईरान-अमेरिका तनाव: कंटेनर भाड़ा ₹1.73 लाख से ₹5.78 लाख हुआ, यूपी कारोबारियों को झटका
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक शिपिंग और व्यापार पर पड़ा है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के कारण पहले से ही शिपिंग मार्ग बाधित थे, और अब होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर हमले की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस दोहरे संकट के चलते कंटेनर शिपिंग की लागत में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है।
पहले यूरोपीय देशों को माल भेजने के लिए 40 फीट का कंटेनर लगभग 1800 यूएस डॉलर (लगभग 1.73 लाख रुपये) में उपलब्ध था, लेकिन वर्तमान में इसका भाड़ा बढ़कर 6000 यूएस डॉलर (लगभग 5.78 लाख रुपये) तक पहुंच गया है। इसके अलावा, निर्यातकों को माल भेजने के लिए कंटेनर प्राप्त करने में एक महीने तक का इंतजार भी करना पड़ रहा है। यह स्थिति उत्तर प्रदेश के निर्यातकों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि उनके माल की लागत काफी बढ़ गई है।
आगरा जैसे शहरों से जूता, हस्तशिल्प उत्पाद, संगमरमर के उत्पाद और अन्य मशीनरी का निर्यात यूरोपीय देशों को होता है। इन उत्पादों का एक बड़ा हिस्सा लाल सागर मार्ग से होकर गुजरता है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों के कारण शिपिंग कंपनियां स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के नीचे केप ऑफ गुड होप से होकर जहाज भेज रही हैं, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के फंसे होने से कंटेनर की कमी और बढ़ गई है, जिससे भाड़ा और भी अधिक हो गया है। इस बढ़ी हुई लागत के कारण भारतीय निर्यातकों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है।
