इंदौर जल त्रासदी: हाई कोर्ट ने प्रशासन की रिपोर्ट पर जताई नाराजगी, मौतों के कारणों का नहीं कोई ठोस आधार
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भागीरथपुरा में दूषित जल पीने से हुई मौतों के मामले में प्रशासन द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया है। अदालत ने मौतों के कारणों को अपर्याप्त और आधारहीन करार दिया है।
प्रशासन की रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि दूषित पानी के सेवन से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, सात अन्य मौतों को अन्य कारणों से होना बताया गया, जिनका दूषित जल से कोई संबंध नहीं है। तीन मौतों का कारण परिजनों से पूछताछ के आधार पर तय किया गया।
इस पर हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन के पास मौतों के वास्तविक कारण तय करने का कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने सरकारी वकील से मौतों के कारणों के निर्धारण का वैज्ञानिक और तथ्यात्मक आधार पूछा, जिस पर वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। कोर्ट ने कहा कि पुख्ता साक्ष्य के बिना यह तय करना संभव नहीं कि कौन-सी मौत दूषित पानी से हुई।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मौतों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की प्रशासनिक प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। अदालत ने जोर दिया कि जब तक वैज्ञानिक और ठोस साक्ष्य उपलब्ध न हों, तब तक शेष मौतों को दूषित पानी के प्रभाव से अलग करना उचित नहीं है। इस मामले में अब प्रशासन को अगली सुनवाई तक अधिक विस्तृत और साक्ष्यों पर आधारित जानकारी पेश करनी होगी। इस घटना ने शहर में जल जनित बीमारियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य की देखरेख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
