भारत-रूस सैन्य सहयोग को मिली नई रफ्तार, पुतिन ने ‘RELOS’ समझौते पर लगाई मुहर
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के साथ एक प्रमुख सैन्य सहयोग समझौते को संघीय कानून में बदल दिया है। क्रेमलिन के अनुसार, इस समझौते को ‘Reciprocal Exchange of Logistics Support’ (RELOS) नाम दिया गया है। यह कदम संसद के दोनों सदनों (स्टेट ड्यूमा और फेडरेशन काउंसिल) द्वारा इसे मंजूरी दिए जाने के बाद उठाया गया। यह समझौता दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
RELOS समझौता भारत और रूस के बीच सैन्य टुकड़ियों, युद्धपोतों और सैन्य विमानों की आवाजाही को नियंत्रित करता है। यह एक-दूसरे की सेनाओं को रसद सहायता प्रदान करने की व्यवस्था भी स्थापित करता है। इसका उपयोग संयुक्त सैन्य अभ्यासों, प्रशिक्षण गतिविधियों, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के दौरान किया जाएगा। समझौते के तहत, दोनों देशों के युद्धपोतों के लिए बंदरगाहों पर रुकना और सैन्य विमानों के लिए एक-दूसरे के हवाई क्षेत्र का उपयोग करना आसान हो जाएगा।
यह समझौता पुतिन की हालिया भारत यात्रा के बाद आया है, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। हालांकि पुतिन ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, लेकिन यह समझौता तभी लागू होगा जब दोनों देश औपचारिक रूप से ‘अनुसमर्थन के साधनों’ (instruments of ratification) का आदान-प्रदान करेंगे। यह कदम भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
