यूपी में टेलीकॉम कंपनियों को सर्वे के लिए नहीं देना होगा शुल्क, आसान होगी टावर लगाने की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने दूरसंचार कंपनियों को बड़ी राहत दी है। अब मोबाइल टावर लगाने या विकास प्राधिकरणों से किसी अन्य प्रकार की अनुमति प्राप्त करने के लिए कंपनियों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि आवेदन प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर सर्वेक्षण के लिए अनुमति प्रदान की जाएगी।
इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए, दूरसंचार कंपनियों से सर्वेक्षण अनुमति के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। उनसे केवल लाइसेंस शुल्क ही लिया जाएगा। विशेष सचिव आवास, राजेश कुमार राय ने इस संबंध में सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश भेजे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की अधिसूचना का कड़ाई से पालन किया जाए, जिसके लिए केंद्र सरकार द्वारा पहले भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
नई व्यवस्था के तहत, अधिसूचना जारी होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर पोर्टल के लिए एक नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा। यदि कोई कंपनी आवेदन करती है, तो उसके आवेदन का परीक्षण किया जाएगा और तय अवधि में काम शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। सर्वेक्षण के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यदि किसी कारणवश आवेदन अस्वीकृत होता है, तो कंपनी द्वारा भुगतान की गई राशि का 90% 15 दिनों के भीतर वापस कर दिया जाएगा। अस्वीकृति के पूरे कारणों को 15 दिनों के अंदर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया गया है कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें और लाइसेंस सर्वेक्षण कर अनुमति समय पर प्रदान करें। इस पहल से प्रदेश में दूरसंचार सेवाओं के विस्तार को बल मिलेगा और नागरिकों को बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी।
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