House Map: जिला पंचायत से नक्शा पास, विकास प्राधिकरणों में फंसे मकान मालिकों को मिली राहत
उत्तर प्रदेश सरकार ने मकान मालिकों को बड़ी राहत देते हुए जिला पंचायत से नक्शा स्वीकृत कराने के बाद भी विकास प्राधिकरणों के नियमों के चलते फँसे भवनों को नियमित (वैध) करने की प्रक्रिया को स्पष्ट कर दिया है। शासन ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है, जिससे लंबे समय से चल रही कानूनी उलझनों का अंत हो गया है। इस फैसले से हजारों मकान मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो नोटिस और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के डर से परेशान थे।
भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में छूट
इस नए शासनादेश के तहत, 200 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर बने आवासीय भवनों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100 प्रतिशत की छूट मिलेगी। अन्य निर्माणों और टाउनशिप के लिए, यदि भू-उपयोग विपरीत है, तो 75 प्रतिशत की छूट का प्रावधान है। यह छूट उन मामलों पर लागू होगी जहां विकास प्राधिकरण की सीमा के भीतर जिला पंचायतों ने नक्शे स्वीकृत किए थे और निर्माण हो चुका है या जारी है।
प्रक्रिया और समय-सीमा
प्रमुख सचिव आवास, पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिला पंचायतों द्वारा 1 अप्रैल 2026 तक स्वीकृत नक्शों के आधार पर बने या निर्माणाधीन भवनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत वैध किया जाएगा। विकास प्राधिकरणों को 12 महीने के भीतर इन मामलों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला पंचायतों को भी आदेश दिया गया है कि वे 15 दिन के भीतर स्वीकृत सभी नक्शों की प्रमाणिक सूची शासन और संबंधित विकास प्राधिकरणों को उपलब्ध कराएं।
वैधता के मानक
यदि निर्माण विकास प्राधिकरण की महायोजना के अनुरूप है और जिला पंचायत से स्वीकृत नक्शे के आधार पर बनाया गया है, तो उसे वैध माना जाएगा। यदि महायोजना के अनुरूप निर्माण है लेकिन भू-उपयोग परिवर्तन आवश्यक है, तो विकास प्राधिकरण इस प्रक्रिया को पूरा करेगा। ऐसे मामलों में, निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन करने पर भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।
अपवाद और विशेष मामले
शासन ने स्पष्ट किया है कि जलाशयों, तालाबों, सरकारी भूमि तथा महायोजना में आरक्षित जल निकायों पर बने निर्माणों का नियमितीकरण नहीं किया जाएगा। ग्रीन बेल्ट पर हुए निर्माण के मामलों में, उतनी ही भूमि दूसरी जगह ग्रीन छोड़ने पर ही नक्शे वैध माने जाएंगे।
इस फैसले से न केवल मकान मालिकों को राहत मिलेगी, बल्कि विकास प्राधिकरणों और जिला पंचायतों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर उत्पन्न होने वाले विवादों में भी कमी आने की संभावना है। यह कदम शहरी विकास को सुचारू बनाने और लोगों को कानूनी पचड़ों से मुक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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