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H-1B वीज़ा बैन से अमेरिका को भारी नुकसान, विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य संकट की चेतावनी दी

By Nov 16, 2025

अमेरिकी सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन द्वारा H-1B वीजा को प्रतिबंधित करने का विधेयक पेश किए जाने से अमेरिका में एक गंभीर संकट की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से देश के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर स्वास्थ्य सेवा में कर्मचारियों की भारी कमी हो सकती है। इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों पर पड़ेगा, जहां डॉक्टरों की संख्या में कमी आने से बीमारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है।

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब कुछ महीने पहले ही तत्कालीन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाने का एलान किया था। अब ट्रंप की पार्टी की सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने तो इसे पूरी तरह से खत्म करने के लिए संसद में विधेयक पेश कर दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करना अमेरिका के लिए ‘अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने’ जैसा होगा।

थिंक टैंक थर्ड वे की सामाजिक नीति निदेशक सारा पियर्स के अनुसार, यदि अमेरिका ने H-1B पर प्रतिबंध लगाया, तो इससे स्वास्थ्य सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कर्मचारियों का भारी अकाल पड़ जाएगा। मार्जोरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि “स्वास्थ्य सेवा छोड़कर H-1B वीजा को सभी क्षेत्रों में बंद कर देना चाहिए।” हालांकि, उनके ही प्रस्ताव में H-1B वीजा की वर्तमान वार्षिक सीमा 85,000 से घटाकर मात्र 10,000 करने का सुझाव दिया गया है।

सारा पियर्स ने मार्जोरी के इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि भले ही मेडिकल सेक्टर को इस प्रस्ताव से बाहर रखा गया हो, लेकिन इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी निश्चित रूप से पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के मेडिकल क्षेत्र में लाखों कर्मचारी H-1B वीजा धारक हैं। यदि यह बिल पास होता है और H-1B वीजा की समयसीमा खत्म होने के बाद ये लोग अपने देश वापस लौट जाते हैं, तो अमेरिकी परिवारों, खासकर ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की संख्या में भारी कमी आएगी, जिससे बीमारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है।

वर्तमान में, H-1B वीजा धारकों में 70% भारतीय नागरिक हैं। ऐसे में इस प्रतिबंध का सबसे अधिक प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, जो अमेरिका की अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यह विधेयक न केवल अमेरिका की अर्थव्यवस्था बल्कि उसकी सामाजिक और स्वास्थ्य संरचना पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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