जेन-जी: भारतीय युवा अपनी जड़ों की ओर लौट रहा, ‘विकसित भारत’ का बनेगा आधार
आज के भारतीय युवा, जिन्हें ‘जेन-जी’ (1995-2010) कहा जाता है, अपनी डिजिटल समझ, तेज सोच और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव के लिए पहचाने जाते हैं। यह पीढ़ी ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘पंच प्रण’ और स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित होकर, जेन-जी पीढ़ी आधुनिकता और विरासत के बीच संतुलन साध रही है।
“जेन-जी” शब्द आज घर-घर की बातचीत का हिस्सा बन गया है। जहां कुछ लोग इस पीढ़ी के जोश और स्पष्टता की सराहना करते हैं, वहीं कुछ इसे बेचैनी से भी जोड़ते हैं। हालांकि, उनकी ऊर्जा, उत्साह और ऊंचाइयों को छूने की चाहत निर्विवाद है। भारत की जेन-जी ने विनाश के बजाय विकास का संकल्प चुना है और भारत के विकास में खुद को झोंक दिया है।
भारत का उत्थान उसकी गहरी सांस्कृतिक जड़ों, समृद्ध परंपराओं और ‘आत्मनिर्भरता’ के भाव में निहित है। 2022 में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘पंच प्रण’ के माध्यम से प्रत्येक भारतीय से गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और अपनी विरासत पर गर्व करने की अपील की। आज के युवा इसी सोच को आत्मसात करते हुए अपनी परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक जड़ों से सचेत जुड़ाव साबित कर रहे हैं।
हाथ में स्मार्टफोन लेकर ग्लोबलाइज़्ड दुनिया में घूम रहे भारतीय युवा, आधुनिकता और विरासत के बीच संतुलन साधते हुए भारत की सदियों पुरानी परंपराओं में अर्थ, पहचान और निरंतरता की तलाश कर रहे हैं। मंदिर जाना, तीर्थाटन, योग और शास्त्रीय संगीत जैसी प्राचीन प्रथाओं में उनकी दिलचस्पी सिर्फ पुरानी पीढ़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आंतरिक संतुलन की अभिव्यक्ति है। नए साल की पूर्व संध्या पर हजारों युवाओं का काशी विश्वनाथ, राम मंदिर, बांकेबिहारी और तिरुपति बालाजी जैसे मंदिरों में जश्न मनाना इसका प्रमाण है।
प्रयागराज कुंभ मेले में युवाओं की सर्वाधिक भागीदारी और भारत को पैदल, साइकिल या ट्रेन से देखने-समझने की उनकी यात्राएं दर्शाती हैं कि भारतीय जेन-जी ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र के साथ अपनी परंपराओं को लेकर दृढ़ता से आगे बढ़ रही है। स्वामी विवेकानंद ने इस युवा शक्ति की असली ताकत को पहचानते हुए कहा था कि वे सिंह के समान विश्व की समस्याओं को सुलझाएंगे। वर्तमान में, प्रधानमंत्री मोदी इसी विश्वास के साथ युवाओं को नीति, निर्णय और नेतृत्व में शामिल कर रहे हैं, उन्हें प्रेरित कर रहे हैं और नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। स्वच्छता अभियान, हर घर तिरंगा, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे जनभागीदारी अभियानों को युवाओं ने ही सफल बनाया है।
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