रूसी डीजल की पहली खेप अमेरिका रवाना, ट्रंप और पुतिन की डील से ऊर्जा बाजार में हलचल | international news
एनर्जी सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जब अमेरिका और रूस के बीच नए आयात समझौते के तहत रूसी डीजल की पहली खेप अटलांटिक पार अमेरिकी तटों की ओर बढ़ चली है। इस डेवलपमेंट से वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
अमेरिकी नेतृत्व और रूसी प्रशासन के बीच हुई इस गुप्त और रणनीतिक डील के तहत रवाना हुआ पहला टैंकर करीब 40,000 टन यानी लगभग 3 लाख बैरल डीजल लेकर न्यूयॉर्क की तरफ बढ़ रहा है। यह मात्रा अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक दिन की कुल खपत का लगभग सात प्रतिशत हिस्सा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में घरेलू स्तर पर आसमान छूती ईंधन की कीमतें मौजूदा प्रशासन के लिए लगातार राजनीतिक सिरदर्द बनी हुई थीं, जिससे निपटने के लिए यह कदम उठाया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ अमेरिका ने यूक्रेन संघर्ष के चलते रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही थी और अन्य देशों पर भी रूसी ऊर्जा उत्पादों के आयात को लेकर दबाव बनाया था, वहीं खुद अमेरिका का यह कदम नीतिगत यू-टर्न के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले से यूक्रेन में खासी नाराजगी है और वहां के नेतृत्व ने इसे कड़े शब्दों में निराशाजनक करार दिया है। हालांकि, इस समझौते से अमेरिकी उपभोक्ताओं को ईंधन के मोर्चे पर कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन दीर्घकालिक प्रभाव अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं।
