देहरादून में PM किसान योजना के लाभार्थियों की बनेगी फार्मर रजिस्ट्री, कृषि विभाग को मिली ट्रेनिंग
केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत, उत्तराखंड में किसानों की डिजिटल पहचान (डिजिटल आईडी) बनाकर एक व्यापक फार्मर रजिस्ट्री तैयार करने की कवायद तेज कर दी गई है। इस महत्वपूर्ण पहल के तहत, सोमवार को देहरादून में राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
यह योजना प्रथम चरण में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों पर केंद्रित होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना की आगामी किस्तों के भुगतान में कोई बाधा न आए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में एग्रीस्टैक के प्रतिनिधियों ने फार्मर रजिस्ट्री के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह रजिस्ट्री किसानों को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने और उनकी पहचान को डिजिटल बनाने में सहायक होगी।
किसानों को मिलेगी यूनिक डिजिटल पहचान
पंजीकरण के बाद, प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान, जिसे फार्मर आईडी कहा जाएगा, प्रदान की जाएगी। यह 11 अंकों की आईडी ई-केवाईसी और फील्ड सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जनरेट होगी। फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पारदर्शी और समय पर पहुंचाया जा सकेगा। इससे सरकार को कृषकों की सही जानकारी के आधार पर नीतियों के नियोजन और निर्धारण में भी मदद मिलेगी। आपदा राहत, कृषि सब्सिडी, फसल ऋण और बीमा योजनाओं का लाभ प्रदान करने के साथ-साथ कृषि योजनाओं के अनुश्रवण में भी यह प्रणाली सहायक सिद्ध होगी।
पायलट प्रोजेक्ट सफल, अब पूरे राज्य में विस्तार
देहरादून जिले की कालसी और त्यूनी तहसीलों में अगस्त माह में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत 128 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री सफलतापूर्वक तैयार की जा चुकी है। अब राज्यभर में राजस्व और कृषि विभाग के कर्मचारी इस कार्य को आगे बढ़ाएंगे, जिसमें कृषि विभाग पंजीकरण अधिकारी और राजस्व विभाग सत्यापन व अनुमोदन का कार्य संभालेगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों के एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार और मुख्य कृषि अधिकारी भी उपस्थित रहे।
