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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मी उतरे सड़क पर, आंदोलन की दी चेतावनी

By Dec 8, 2025

संत कबीर नगर में निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों का गुस्सा फुट पड़ा है। खलीलाबाद शहर के बैंक रोड स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय परिसर में गुरुवार को बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में जोरदार धरना प्रदर्शन किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया।

संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक निजीकरण की प्रक्रिया को पूर्ण रूप से निरस्त नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। समिति के पदाधिकारियों, सुनील प्रजापति और नारायण चंद्र चौरसिया ने कहा कि यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती।

इंजीनियर राजेश कुमार ने कहा कि संपूर्ण पॉवर सेक्टर के निजीकरण के उद्देश्य से लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2025 को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। यह बिल न केवल बिजली क्षेत्र के भविष्य के लिए खतरनाक है, बल्कि कर्मचारियों के हितों पर भी कुठाराघात करेगा। उन्होंने सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग की।

एक अन्य पदाधिकारी, इंजीनियर पंकज कुमार ने आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है, जो कि सरासर गलत है।

वहीं, इंजीनियर धनंजय सिंह ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय को पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन का गलत कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय एक वर्ष पूर्व घाटे के गलत आंकड़ों के आधार पर लिया गया था, जिसका खामियाजा आम जनता और कर्मचारी भुगतेंगे।

कर्मचारियों ने बताया कि आंदोलन के चलते अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। इसके अलावा, फेशियल अटेंडेंस के नाम पर कर्मचारियों का वेतन रोक कर रखा गया है। 87 विद्युत अभियंताओं को चार्जशीट दी गई है और उनके प्रमोशन को भी रोक दिया गया है। इन सभी मांगों को लेकर कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।

इस धरना-प्रदर्शन में अटेवा के जिलाध्यक्ष दिनेश चौहान, जिला मंत्री हरिकिशोर सिंह, उपाध्यक्ष उदयराज यादव, सफाई कर्मी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में अन्य कर्मचारी भी शामिल रहे। उन्होंने एकजुट होकर निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई और अपनी मांगों को लेकर दृढ़ संकल्प व्यक्त किया।

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