अखिलेश के आरोपों पर चुनाव आयोग का जवाब, ‘UP Voter List’ से सिर्फ 4336 नाम आपत्ति पर कटे
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाए जा रहे गंभीर आरोपों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने बताया कि ‘UP Voter List’ से नाम काटने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जा रही है और अब तक केवल 4,336 नाम ही दूसरों की आपत्ति पर जांच के बाद हटाए गए हैं। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब राजनीतिक गलियारों में मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर बहस तेज है, जिसका सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।
अखिलेश यादव लगातार आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा के इशारे पर दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों के नाम फॉर्म 7 के जरिए जानबूझकर काटे जा रहे हैं। उनका कहना है कि उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जो पढ़-लिख नहीं सकते, जिससे वे आपत्ति का जवाब न दे पाएं। इन आरोपों ने राज्य में राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मतदाता सूची से नाम काटने के लिए कुल 1.35 लाख फॉर्म-7 भरे गए थे, जिनमें से 23,935 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने आंकड़ों का विवरण देते हुए बताया कि 14,388 नाम तो मतदाताओं ने खुद अपने परिवार में मृत्यु या दो जगह नाम होने के कारण कटवाए हैं। वहीं, 5,211 नाम लोगों ने खुद के दूसरी जगह चले जाने के आधार पर कटवाए हैं। किसी अन्य व्यक्ति की आपत्ति पर जांच के बाद केवल 4,336 नाम ही हटाए गए हैं। आयोग ने यह भी बताया कि 2.22 करोड़ तार्किक विसंगतियों वाले मामलों की बीएलओ घर-घर जाकर सुनवाई करेंगे और मतदाता के घर पर न होने की स्थिति में परिवार के दूसरे सदस्य भी दस्तावेज दे सकेंगे।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से मिलने का समय मांगा है ताकि वे अपनी शिकायतें रख सकें। दूसरी ओर, भाजपा के नेता और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश के आरोपों को अफवाह करार दिया है। मौर्य ने तंज कसते हुए कहा कि सपा के पास गुंडे और माफिया हैं, कार्यकर्ता नहीं हैं, और भाजपा सपा का काम नहीं करेगी।
