पुरुष आयोग के गठन की मांग को लेकर शूर्पणखा का पुतला दहन | maharashtra news
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में विजयादशमी के पावन पर्व पर एक ऐसा अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने समाज में पुरुषों के अधिकारों और उनके सामने आने वाली कानूनी चुनौतियों पर नई बहस छेड़ दी है। वालुज स्थित ‘पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम’ की ओर से इस बार भी परंपरा निभाते हुए शूर्पणखा का प्रतीकात्मक दहन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सरकार से देश में एक स्वतंत्र ‘पुरुष आयोग’ के गठन की मांग करना था।
संगठन से जुड़े लोगों का तर्क है कि जिस प्रकार महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और न्याय के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आयोग बनाए गए हैं, ठीक उसी तरह पुरुषों की समस्याओं को सुनने के लिए भी एक अलग न्यायिक मंच होना चाहिए। उनका कहना है कि हर मामले में पुरुष को दोषी मान लेना और उनकी बात सुने बिना कार्रवाई करना समाज में असंतुलन पैदा कर रहा है।
कानूनों के दुरुपयोग का लगाया आरोप
संगठन के अध्यक्ष भारत फुलारे के अनुसार, पिछले एक दशक से अधिक समय से हर विजयादशमी पर शूर्पणखा का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कुछ विशेष कानूनों का कई बार कथित तौर पर दुरुपयोग होता है, जिससे न केवल पुरुषों बल्कि उनके पूरे परिवार को मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। संगठन का यह भी मानना है कि न्याय प्रणाली में दोनों पक्षों की निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।
आंदोलन जारी रखने का संकल्प
पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक केंद्र या राज्य सरकार पुरुषों के लिए किसी स्वतंत्र आयोग के गठन का कदम नहीं उठाती, तब तक उनका यह संघर्ष और विरोध प्रदर्शन इसी प्रकार जारी रहेगा। इस तरह के अनोखे आयोजनों के जरिए संगठन लगातार सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, ताकि पारिवारिक विवादों के मामलों में पुरुषों को भी न्यायोचित मंच मिल सके।
