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मेरठ जिला जेल में बंद महिला कैदियों के मामलों ने बढ़ाई हलचल, पतियों की हत्या की साजिश के आरोप | meerut news

By Oct 20, 2026

मेरठ की जिला जेल में बंद कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों की गूंज एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में दो अलग-अलग हत्याकांडों में अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद जेल के भीतर और बाहर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इन फैसलों के बाद जेल में बंद अन्य महिला कैदियों और उनके परिवारों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं, जिन पर अपने ही पतियों की हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप है।

अदालती फैसलों और कानूनी प्रक्रिया
हाल ही में सौरभ राजपूत और अमित कश्यप हत्याकांड में दोषियों को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। इन फैसलों के सामने आने के बाद दोषियों के परिजनों ने उच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इन मामलों के बीच जेल में बंद अन्य महिलाओं जैसे अंजलि, कोमल, इल्मा और गुरप्रीत के मामले भी नए सिरे से चर्चा का विषय बन गए हैं। हालांकि, इन सभी मामलों में अंतिम निर्णय अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों और सुनवाई की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

विभिन्न मामलों की पृष्ठभूमि
मेरठ जेल में बंद महिलाओं पर लगे आरोपों की फेरबहिस्त लंबी है। पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, पारिवारिक विवाद और कथित अवैध संबंधों के चलते इन वारदातों को अंजाम दिया गया। परीक्षितगढ़ क्षेत्र की रहने वाली अंजलि पर अपने पति की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है, जो फिलहाल जेल में सिलाई और धार्मिक गतिविधियों में समय बिता रही है। इसी तरह, बीएसएफ जवान की पत्नी कोमल और जाकिर कॉलोनी की इल्मा पर भी अपने पतियों की हत्या के लिए प्रेमियों के साथ मिलकर साजिश रचने के आरोप हैं। इसके अलावा बच्चों की हत्या से जुड़े मामलों में भी कुछ महिलाओं को नामजद किया गया है।

इस प्रकार की घटनाएं समाज के ताने-बाने और पारिवारिक रिश्तों में आ रही दरार को गहराई से रेखांकित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से न केवल जुड़े हुए परिवारों का भविष्य प्रभावित होता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। फिलहाल सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी है और अदालत के रुख पर सबकी नजर टिकी हुई है।

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