ड्यूटी के दबाव से बीमार हो रहे देश के डॉक्टर, अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली ‘doctors health news’
देश के चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों की कमी और अत्यधिक जिम्मेदारी के बोझ ने उनकी जीवनशैली को बुरी तरह प्रभावित किया है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, बड़ी संख्या में डॉक्टर स्वयं जीवनशैली से जुड़ी गंभीर बीमारियों (लाइफस्टाइल डिजीज) की चपेट में आ रहे हैं। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब ये डॉक्टर ही आम जनता को स्वस्थ रहने की सलाह देते हैं।
‘जर्नल आफ मिड-लाइफ हेल्थ’ में प्रकाशित इस अध्ययन में दिल्ली सहित सात राज्यों के 265 चिकित्सकों को शामिल किया गया था। अध्ययन में पाया गया कि 48 प्रतिशत डॉक्टर हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित थे, जबकि 23 प्रतिशत को डायबिटीज की समस्या थी। इसके अलावा, 14 प्रतिशत डॉक्टर हाई कोलेस्ट्रॉल, थायराइड और हृदय रोगों से जूझ रहे थे। कुछ चिकित्सकों में मोटापे की समस्या भी पाई गई।
अध्ययन में चिकित्सकों की बिगड़ती सेहत के प्रमुख कारणों की पहचान की गई। इनमें लंबे ड्यूटी आवर्स, लगातार नाइट शिफ्ट, मानसिक तनाव, नींद की कमी और अनियमित खान-पान शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि काम के दबाव के कारण डॉक्टर अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते हैं।
इस संबंध में दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल का एक उदाहरण भी सामने आया था, जहां हृदय रोग विभाग के एक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने लगातार 72 घंटे की ड्यूटी के बाद इस्तीफा दे दिया था। यह घटना राजधानी के अस्पतालों में डॉक्टरों पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को दर्शाती है। शोधकर्ताओं ने चिकित्सकों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, वर्क-लाइफ बैलेंस, मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और संस्थागत स्तर पर वेलनेस गाइडलाइंस लागू करने की सिफारिश की है।
