अमेरिका और कनाडा में बढ़ रहा भारतीयों का डिपोर्टेशन, हजारों छात्र और प्रोफेशनल खतरे में
अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है, जिसके चलते हजारों भारतीयों को देश से निकाला जा रहा है। इस साल अगस्त के पहले 15 दिनों में ही 5200 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया जा चुका है। इस बार की डिपोर्टेशन लिस्ट में एच-1 बी, ओ-1 और स्टूडेंट वीसा पर अमेरिका गए भारतीय भी शामिल हैं, जिनमें प्रोफेशनल्स की अच्छी खासी संख्या है। इस साल हर तीसरे हफ्ते में एक डिपोर्टेशन फ्लाइट रवाना की गई है।
कनाडा के अल्बर्टा प्रांतीय सरकार ने पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) रद्द कर दिया है। इसके चलते वहां पढ़ाई कर रहे लगभग 1500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा बढ़ गया है। इन छात्रों का कहना है कि कनाडा सरकार की ओर से जॉब गारंटी को बढ़ाया जाना चाहिए और इसके लिए नए कानून बनाए जाएं।
इमिग्रेशन एजेंसी (आईस) के अधिकारियों के अनुसार, अवैध प्रवासियों के खिलाफ धरपकड़ और डिपोर्टेशन दोनों की संख्या बढ़ी है। इस साल के अंत तक डिपोर्ट किए जाने वाले अवैध प्रवासियों की रिकॉर्ड संख्या होने की उम्मीद है। पिछले साल 2025 में डिपोर्ट किए गए तीन हजार से ज्यादा भारतीयों में सभी ऐसे थे, जो अवैध रूप से अमेरिका में आए थे। आईस ने जून में ही 801 भारतीयों को रिमूवल ऑर्डर जारी किया था, जिसके खिलाफ कोर्ट में अपील की जा सकती है या व्यक्ति स्वेच्छा से देश छोड़ सकता है।
ह्यूमन राइट्स फर्स्ट संगठन के अनुसार, भारतीयों को ओमानी एयरवेज से डिपोर्ट किया जा रहा है, और टेक्सास के हार्लिंग से 20 घंटे की फ्लाइट से नई दिल्ली भेजा जा रहा है। इस साल डिपोर्टेशन उड़ानों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि पिछले साल अमेरिका ने सैन्य विमान हरक्यूलिस से डिपोर्ट किया था।
वैध वीसा पर आए प्रोफेशनल्स को भी किसी भी छोटे-मोटे उल्लंघन, जैसे ट्रैफिक लाइट पार करने या सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने पर डिपोर्ट किया जा रहा है। टेक्सास में एच-1बी वीसा होल्डर की नौकरी जाने के बाद भी उसे नई जॉब खोजने का समय नहीं दिया गया। एक रेस्तरां में पार्ट टाइम जॉब करते समय पकड़े जाने पर वीसा उल्लंघन का दोषी मानकर भारत डिपोर्ट कर दिया गया।
2025 में अमेरिका ने 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया था, जो पिछले 16 सालों में सबसे अधिक संख्या थी। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2026 में जून तक 1076 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया था। 5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था, जिसमें कई लोगों को हथकड़ी और बेड़ियां लगी थीं, जिस पर काफी विवाद हुआ था।
कनाडा के अल्बर्टा राज्य सरकार द्वारा पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) रद्द किए जाने से वहां पढ़ाई कर रहे करीब 1,500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। ये छात्र स्टडी-जॉब प्रोग्राम के तहत पढ़ाई के बाद नौकरी भी कर रहे थे। अल्बर्टा के इन छात्रों ने धरना-प्रदर्शन किया है। कनाडा इमिग्रेशन का कहना है कि कुछ समय तक ये छात्र नौकरी कर सकते हैं।
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी का कहना है कि जिन छात्रों के पास वैध वीसा या वर्क परमिट नहीं है, उन्हें जाना होगा। अल्बर्टा के प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा कि स्टडी वीसा एक अस्थायी दस्तावेज है और विदेशी छात्र इस आधार पर कनाडा में हमेशा के लिए नहीं रह सकते। उन्होंने जोर दिया कि कनाडा के कॉलेज अल्बर्टा के टैक्सपेयर्स के लिए हैं और छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने देश लौटना होगा।
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